न्यूज स्कूप : आधुनिक जीवनशैली में स्वाद सेहत पर भारी पड़ता जा रहा है। वजन बढ़ना, पेट की चर्बी, लगातार थकान और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं रातों-रात नहीं आतीं, बल्कि यह सालों की गलत खान-पान की आदतों का नतीजा होती हैं। हम अक्सर चीनी को सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी रसोई में ऐसी और भी कई ‘सफेद’ चीजें (White Foods) मौजूद हैं जो अंदर ही अंदर हमारे अंगों को खोखला कर रही हैं?
डाइट एक्सपर्ट्स और हेल्थ रिपोर्ट्स की मानें तो ये सफेद चीजें ‘रिफाइंड’ होती हैं, जिनमें पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और सिर्फ कैलोरी बचती है। आइए जानते हैं उन 4 सफेद चीजों के बारे में, जिन्हें एक्सपर्ट्स ‘धीमा जहर’ मानते हैं।
स्ट्रीट फूड हो या घर का सैंडविच, आजकल मेयोनीज का इस्तेमाल हर जगह हो रहा है।
- खतरा: इसे बनाने के लिए भारी मात्रा में तेल, अंडे की जर्दी और प्रिजर्वेटिव्स का उपयोग किया जाता है। एनसीबीआई (NCBI) के अनुसार, मेयोनीज का अधिक सेवन शरीर में ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ को बढ़ाता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा रहता है। बच्चों में बढ़ते मोटापे का एक बड़ा कारण यह सफेद सॉस ही है।
भारत के अधिकांश हिस्सों में सफेद चावल मुख्य भोजन है, लेकिन रिफाइनिंग के दौरान इसके ऊपर से फाइबर की परत (Bran) हटा दी जाती है।
- खतरा: हेल्थलाइन (Healthline) के मुताबिक, सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत हाई होता है। यह खून में शुगर के लेवल को अचानक बढ़ा देता है। जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, उनके लिए रोजाना चावल खाना मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज को दावत देने जैसा है।
सुबह की जल्दबाजी में वाइट ब्रेड सबसे आसान नाश्ता लगता है, लेकिन यह मैदे और रिफाइंड शुगर का मेल है।
- खतरा: इसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता, जिससे यह आंतों में चिपक सकता है। इसका लगातार सेवन किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है।
मोमोज, पिज्जा, चाऊमीन या समोसे—इन सब का मुख्य आधार मैदा ही है। सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि मैदे को प्रोसेस करते समय सारे विटामिन्स और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं।
- खतरा: मैदा गट हेल्थ (पेट के स्वास्थ्य) को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। यह कब्ज पैदा करता है और मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देता है, जिससे पेट के आसपास जिद्दी चर्बी जमा होने लगती है।
| खाद्य पदार्थ | मुख्य समस्या | विकल्प (Healthy Swaps) |
| चीनी | सूजन और मोटापा | गुड़ या स्टीविया |
| मैदा | पाचन की समस्या | चोकर युक्त आटा |
| सफेद चावल | हाई ब्लड शुगर | ब्राउन राइस या ओट्स |
| मेयोनीज | हाई कोलेस्ट्रॉल | हमस (Hummus) या दही की चटनी |
डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा का कहना है कि इन चीजों को रातों-रात छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इनकी मात्रा कम करना आपके हाथ में है। वाइट ब्रेड की जगह ‘होल ग्रेन ब्रेड’ और मैदे की जगह ‘मल्टीग्रेन आटे’ का चुनाव करें। याद रखें, आपकी थाली जितनी रंगीन (सब्जियों और फलों से भरपूर) होगी, आप बीमारियों से उतने ही दूर रहेंगे।
‘सफेद’ दिखने वाली हर चीज शुद्ध नहीं होती। रिफाइंड फूड्स का आकर्षण कम करें और प्राकृतिक, फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। एक छोटा सा बदलाव आपके बुढ़ापे को बीमारियों से मुक्त बना सकता है।
