न्यूज स्कूप : रात के बीच में अचानक नींद टूट जाना और फिर घंटों करवटें बदलते रहना एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जिसे ‘मिडिल ऑफ द नाइट इंसोम्निया’ भी कहा जाता है। बार-बार नींद टूटने से आपकी दिनचर्या और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।
हालांकि, अब आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। स्लीप एक्सपर्ट्स कुछ ऐसे आसान और प्रभावी टिप्स बताते हैं, जिनका पालन करके आप बीच रात में जागने के बाद भी वापस जल्दी सो सकते हैं और अपनी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) को बेहतर बना सकते हैं।
यहाँ 8 आसान टिप्स दिए गए हैं, जो आपकी नींद को टूटने से बचाएंगे और आपको गहरी नींद दिलाएंगे:
एक्सपर्ट्स के अनुसार, फोन, टीवी या बल्ब की नीली रोशनी नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को कम करती है।
- उपाय: सोने से कम से कम एक घंटा पहले कमरे की सभी तेज लाइटें बंद कर दें और मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहें। नीली रोशनी से दूरी आपकी नींद को बार-बार टूटने से रोकेगी।
अच्छी नींद के लिए कंसिस्टेंसी यानी निरंतरता बहुत जरूरी है।
- उपाय: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें, यहाँ तक कि वीकेंड (छुट्टी) पर भी। यह आदत आपके शरीर की आंतरिक घड़ी (Circadian Rhythm) को नियंत्रित करती है, जिससे बार-बार नींद टूटने की समस्या खत्म हो सकती है।
कुछ खाद्य पदार्थ नींद में सुधार लाने में सीधे तौर पर मदद करते हैं, क्योंकि उनमें मेलाटोनिन या अन्य रिलैक्सिंग कंपाउंड होते हैं।
- उपाय: रात के समय चेरी या चेरी जूस पीने से नींद बेहतर होती है, क्योंकि इनमें मेलाटोनिन होता है। इसके अलावा, बादाम और केले भी नींद सुधारने में मदद करते हैं।
- बचाव: शाम के समय भारी या मसालेदार खाना खाने से बचें, क्योंकि यह अपच पैदा कर सकता है और नींद टूटने का कारण बन सकता है।
वाईफाई राउटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें नींद के सर्कैडियन रिदम को प्रभावित कर सकती हैं।
- उपाय: सोते समय वाईफाई राउटर और अन्य गैजेट्स को बिस्तर से दूर रखें या हो सके तो रात में बंद कर दें।
अगर आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो इसका एक बड़ा कारण तनाव या बेचैनी हो सकती है।
- उपाय: सोने से पहले और बीच रात में जागने के बाद मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। मेडिटेशन से दिमाग शांत होता है और स्ट्रेस कम होता है, जिससे शरीर रिलैक्स होकर जल्दी नींद में चला जाता है।
नींद की कमी से कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन जैसे हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जो ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं।
- उपाय: हार्मोन को संतुलित रखने और अच्छी नींद के लिए दिनभर संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
सोने के लिए सही तापमान शरीर को जल्दी रिलैक्स करने में मदद करता है।
- उपाय: सोने के लिए आदर्श तापमान करीब 18 डिग्री सेल्सियस होता है। इसके अलावा, पैरों में मोजे पहनने से शरीर का तापमान कंट्रोल में रहता है और मेलाटोनिन रिलीज होकर नींद लाने में मदद करता है।
तनाव का सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है।
उपाय: रोजाना डिस्ट्रेसिंग एक्टिविटी करें, जैसे धीमी ब्रीदिंग एक्सरसाइज, हल्की स्ट्रेचिंग या अपनी भावनाओं को जर्नलिंग (डायरी) में लिखना।

