न्यूज स्कूप : समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर से बेहद बढ़ गई हैं। रामपुर की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने उन्हें और उनके बेटे पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में दोषी करार देने के बाद आज, सोमवार (17 नवंबर) को 7 साल जेल की सजा सुनाई है।
इस फैसले के साथ ही, आजम खान को रिहा होने के केवल दो महीने बाद ही एक बार फिर जेल जाना पड़ सकता है। फैसला सुनाए जाने से पहले ही आजम खान और केस के वादी बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना कोर्ट पहुंच चुके थे।
आजम खान का यह पूरा मामला बेटे अब्दुल्ला आजम द्वारा दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाने से संबंधित है। बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में रामपुर के सिविल लाइन्स थाने में इस संबंध में केस दर्ज कराया था, जिसमें आजम खान और उनके बेटे पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था।
बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने जानबूझकर दो अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए थे, जिसका उपयोग सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं में किया गया।
- पैन कार्ड 1 में जन्मतिथि: 1 जनवरी 1993
- पैन कार्ड 2 में जन्मतिथि: 30 सितंबर 1990
जांच के बाद, इस पूरे कृत्य में सपा नेता आजम खान को भी आरोपी बनाया गया था।
आजम खान के लिए यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका है। वह करीब दो महीने पहले ही 23 सितंबर को सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। तभी से ही वह प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा में बने हुए थे।
हाल ही में, एक हफ्ते पहले आजम खान को हेट स्पीच मामले में एक कोर्ट ने बरी कर दिया था, जिससे उनके समर्थकों को थोड़ी राहत मिली थी। हालांकि, अब इस पैन कार्ड मामले में 7 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी मुश्किलें फिर से चरम पर पहुंच गई हैं।
आजम खान पर अकेले 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। पूरे परिवार पर मामलों का अंबार लगा हुआ है:
- आजम खान: कुल 104 केस दर्ज हैं।
- अब्दुल्ला आजम: उनके खिलाफ करीब 40 मामले दर्ज हैं।
- आजम खान की पत्नी: उनकी पत्नी भी करीब 30 मामलों में आरोपी हैं।
- बड़े बेटे अदीब आजम: उनके खिलाफ भी 20 से अधिक मामले दर्ज हैं।
कई मामलों में वे बरी हो चुके हैं, लेकिन कई अन्य मामलों में फैसला आना अभी बाकी है। इस सजा के बाद, आजम खान और अब्दुल्ला दोनों को आगे की कानूनी लड़ाई ऊपरी अदालतों में लड़नी होगी।
