न्यूज़ स्कूप डेस्क : राजधानी रायपुर में बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की वनोपज अर्थव्यवस्था को बदलने का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। मेडिकल कॉलेज सभागार में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवनियुक्त अध्यक्ष रूप साय सलाम और उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा को पदभार ग्रहण कराने के बाद वनांचल के आर्थिक भविष्य पर विस्तृत दृष्टिकोण साझा किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वनोपज संग्राहक और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद थे।
CM साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का वनांचल राज्य की आत्मा है और यहां रहने वाले परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा स्तंभ वनोपज है। उन्होंने विश्वास जताया कि रूप साय सलाम, जो स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं, वनोपज संग्राहकों की समस्याओं को जमीनी स्तर से समझते हैं और उनके हितों की रक्षा प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई टीम के नेतृत्व से राज्य में वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संग्राहकों की आय में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा।
साय ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वनोपज का वैल्यू एडिशन, बेहतर मार्केट लिंकिंग, और उचित मूल्य तय करना उनकी शीर्ष रणनीतियों में शामिल है। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सबसे अधिक मूल्य देने का निर्णय छत्तीसगढ़ के वनवासियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता के दाम 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा करना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ सरकार ट्राइबल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ और ‘पीएम जनमन योजना’ जनजातीय इलाकों में तेजी से परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को जनजातीय समाज के सपनों को ध्यान में रखकर बनाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए जनजातीय सशक्तीकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना चुके हैं।
अपने संबोधन में वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ की 32% आबादी जनजातीय है और 44% भू-भाग वनाच्छादित है। ऐसे में वनोपज ही लाखों परिवारों की प्रत्यक्ष जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ कहा जाता है और इसके बढ़े हुए मूल्य से लाखों संग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि चरण पादुका योजना को फिर से शुरू किया जा चुका है और कई नई योजनाएँ तेजी से जमीन पर उतर रही हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, नान चेयरमैन संजय श्रीवास्तव, योग आयोग अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा, आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम और वक्फ बोर्ड चेयरमैन डॉ. सलीम राज समेत अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पदभार ग्रहण समारोह के साथ, वनोपज संघ की नई नेतृत्व टीम ने आधिकारिक रूप से अपना कार्यकाल शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में वनोपज आधारित विकास, बाजार विस्तार और मूल्यवर्धन से छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तीकरण के नए अध्याय जुड़ेंगे।
