17 Mar 2026, Tue
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सुंदर पिचाई का बड़ा अलर्ट: AI के हर जवाब को सच न मानें, गूगल CEO ने बताया क्यों जरूरी है ‘AI आउटपुट’ को क्रॉस-चेक करना

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न्यूज स्कूप : गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के CEO सुंदर पिचाई ने एक हालिया इंटरव्यू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का उपयोग करने वाले लोगों को साफ तौर पर चेतावनी दी है। पिचाई ने कहा है कि मौजूदा AI तकनीक अभी भी गलतियाँ करती है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को AI टूल्स द्वारा बताए गए हर जवाब को पूरी तरह सच नहीं मानना चाहिए।

उनका कहना है कि AI आउटपुट को अन्य भरोसेमंद स्त्रोतों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना ही समझदारी है।

AI से गलती होना सामान्य, स्वस्थ इकोसिस्टम जरूरी

सुंदर पिचाई ने इस बात को स्वीकार किया कि आज के AI मॉडल, जिन्हें अक्सर ‘हालुसिनेशन’ (भ्रम) के लिए जाना जाता है, अभी भी त्रुटियों के प्रति संवेदनशील हैं। यही वजह है कि एक स्वस्थ और विविध सूचना इकोसिस्टम जरूरी है ताकि लोग सिर्फ AI पर निर्भर न रहें।

पिचाई ने कहा कि, “कंपनी सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए काफी मेहनत करती है, लेकिन मौजूदा स्टेट-ऑफ-द-आर्ट AI अभी भी गलत जवाब दे सकता है।” इसी कारण Google अपने AI टूल्स पर चेतावनी संदेश दिखाता है कि वे कभी-कभी गलत तथ्य दे सकते हैं। इससे पहले, Google के AI Overviews फीचर को भी गलत और अटपटे जवाबों के कारण कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

को फैक्ट-चेक करने की जिम्मेदारी यूजर्स पर न डालें

हालांकि, कई विशेषज्ञों ने पिचाई के इस बयान पर अपनी असहमति भी जताई है। उनका कहना है कि यह जिम्मेदारी बड़ी टेक कंपनियों पर होनी चाहिए कि वे अपनी AI गलतियों का समाधान खुद करें न कि यूज़र्स से अपेक्षा करें कि वे हर आउटपुट को फैक्ट-चेक करें।

प्रोफेसर जीना नेफ जैसे विशेषज्ञों ने कहा कि AI चैटबॉट “लोगों को खुश करने के लिए जवाब गढ़ लेते हैं” और यह एक बड़ी समस्या है, खासकर तब जब मामला स्वास्थ्य, विज्ञान या किसी गंभीर जानकारी से जुड़ा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को ऐसी तकनीक नहीं जारी करनी चाहिए जिसका आउटपुट भरोसेमंद न हो।

AI की गलतियों पर रिसर्च भी उठाती है सवाल

बीबीसी (BBC) द्वारा किए गए एक अध्ययन में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि AI जनरेटेड जानकारी को बिना जांचे मान लेना खतरे से खाली नहीं है। इस रिसर्च में पाया गया कि ChatGPT, Copilot, Gemini और Perplexity — इन सभी प्रमुख AI चैटबॉट्स ने न्यूज़ लेखों के सारांश में “काफी गलतियां” कीं। इस अध्ययन से साफ है कि AI से मिली जानकारी को किसी भी गंभीर निर्णय से पहले क्रॉस-चेक करना बेहद जरूरी है।

Gemini 3.0 और AI Mode की तैयारी

AI की इन सीमाओं के बावजूद, गूगल इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा है। कंपनी जल्द ही अपना कंज़्यूमर AI मॉडल Gemini 3.0 लॉन्च करने की तैयारी में है जो बाजार में ChatGPT की बढ़त को चुनौती देगा।

इसके अलावा, Google ने सर्च में एक नया “AI Mode” जोड़ा है जिससे यूजर Gemini से ऐसे बात कर सकते हैं जैसे किसी विशेषज्ञ से बात कर रहे हों। पिचाई का कहना है कि यह AI प्लेटफ़ॉर्म शिफ्ट का नया चरण है और Google की प्रतिस्पर्धा बरकरार रखने की कोशिश भी।

By News Scoop Desk

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