28 Feb 2026, Sat
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छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक क्षण: प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान, हिंदी के 12वें लेखक

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न्यूज स्कूप : हिंदी साहित्य जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को आज उनके निवास पर आयोजित एक सादे और गरिमापूर्ण कार्यक्रम में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी ने उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान पत्र और प्रशस्ति-पत्र सौंपा। इस मौके पर साहित्य, कला और संस्कृति जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

88 वर्षीय शुक्ल को यह सम्मान उनकी शांत गहनता और अद्भुत कल्पनाशीलता के बल पर आधुनिक हिंदी साहित्य को नई ऊंचाई देने के लिए दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के पहले और हिंदी के 12वें लेखक

विनोद कुमार शुक्ल की यह उपलब्धि कई मायनों में ऐतिहासिक है:

  1. वह यह सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान पाने वाले छत्तीसगढ़ से पहले साहित्यकार हैं।
  2. समग्र रूप से, वह यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाले हिंदी के 12वें लेखक हैं।

वक्ताओं ने इस अवसर पर साहित्यकार शुक्ल के रचनात्मक कार्यों और हिंदी साहित्य को मिले उनके विशिष्ट योगदान की जमकर प्रशंसा की।

सादगी भरे लेखन की विशिष्ट पहचान

शुक्ल आधुनिक हिंदी साहित्य के चुनिंदा कथाकारों और कवियों में से एक हैं, जो अपनी विशिष्ट भाषा और अद्भुत कल्पनाशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखन शैली को धीमी रोशनी में चमकते सत्य की तरह माना जाता है, जो समाज के सूक्ष्म अनुभवों, साधारण मनुष्यों की दुनिया और जीवन की विसंगतियों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

उनकी चर्चित कृतियों में उपन्यास जैसे ‘नौकर की कमीज’ (The Shirt of the Servant), ‘खिलेगा तो देखेंगे’ और ‘दीवार में खिड़की रहती थी’ (The Wall Has a Window) शामिल हैं। साथ ही, उनके कई उल्लेखनीय कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं।

  • पिछली उपलब्धियाँ: उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ पर फ़िल्मकार मणिकौल ने 1999 में एक फिल्म बनाई थी, जिसे ‘केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’ में सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, उनके दूसरे उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।

विनोद कुमार शुक्ल ने जताया आभार

इस उपलब्धि पर विनोद कुमार शुक्ल ने भारतीय ज्ञानपीठ और सभी साहित्य प्रेमियों के प्रति गहरा आभार जताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, “साहित्य मनुष्य को अपने भीतर झांकने की क्षमता देता है। लेखक का कर्तव्य है कि वह जीवन की छोटी रोशनियों को शब्दों से समां बांधते रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्यकार शुक्ल को प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

सीएम साय ने कहा कि, “विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य की उस विराट परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसने अपनी सादगी, संवेदना और अद्भुत लेखन-शक्ति से साहित्य की दुनिया में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी लेखनी ने न केवल हिंदी भाषा को समृद्ध किया है, बल्कि पाठकों की अनेक पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने शुक्ल के सुदीर्घ, स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनका रचनात्मक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

By News Scoop Desk

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