न्यूज स्कूप : इथियोपिया के Hayli Gubbi इलाके में लंबे समय से निष्क्रिय ज्वालामुखी रविवार (23 नवंबर 2025) को लगभग 10 हजार सालों में पहली बार फटा। इस अप्रत्याशित विस्फोट से राख और सल्फर डाइऑक्साइड की एक मोटी लेयर हजारों फीट की ऊंचाई तक आसमान में तैर रही है। इस भारी विस्फोट के कुछ ही मिनटों के भीतर गाढ़ा, काला और बेहद बारीक कणों वाला धुआं विशालकाय गुबार के रूप में फैल गया।
ज्वालामुखी विस्फोट का यह असर केवल स्थानीय नहीं रहा। हवा के तेज बहाव के साथ यह राख काफी लंबी दूरी तक पहुंच गई और इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय एयर रूट्स भी इसके दायरे में आ गए। जैसे ही यह जानकारी मिली कि ज्वालामुखीय राख उस अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र (FIR) तक पहुंच गई है, जिसके ऊपर से भारत की कई उड़ानें रोजाना गुजरती हैं, भारत की एविएशन रेगुलेटरी संस्था DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) तुरंत सतर्क हो गई।
DGCA ने तुरंत सभी एयरलाइंस को एक सख्त एडवाइजरी जारी की और साफ कहा कि जिन रूट्स में वॉल्केनिक ऐश (Volcanic Ash) मौजूद है, उन क्षेत्रों से उड़ान भरने से बिल्कुल बचा जाए।
ज्वालामुखी का धुआं दिखने में भले साधारण लगे, लेकिन यह असल में ज्वालामुखीय राख होती है, जिसमें छोटे-छोटे कांच जैसे कण होते हैं। ये कण विमान के इंजन में प्रवेश कर उसे गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे इंजन फेल होने और विमान दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।
DGCA ने एयरलाइंस और क्रू सदस्यों के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके:
- रूट अपडेट: एयरलाइंस को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने फ्लाइट प्लान, रूट और ऊंचाई से जुड़े फैसले लगातार अपडेट होने वाली Volcanic Ash Advisories (वॉल्केनिक ऐश एडवाइजरी) के आधार पर लें।
- सतर्कता: पायलटों, डिस्पैच टीम और केबिन क्रू को भी ज्वालामुखीय राख से जुड़े खतरों की जानकारी देकर पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है।
उड़ान के दौरान किसी भी असामान्य स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:
- इंजन की आवाज़ में बदलाव दिखे।
- परफॉर्मेंस (गति या ऊंचाई) कम हो।
- केबिन में धुआं या कोई अनजान गंध महसूस हो।
एयरपोर्ट स्तर पर भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। जहां-जहां राख पहुंचने की संभावना है, वहां रनवे, टैक्सीवे और हवाई क्षेत्र की विशेष जांच करने को कहा गया है। जरुरत पड़ने पर ऑपरेशन रोकने या सीमित करने की सलाह भी दी गई है।
DGCA ने एयरलाइंस को 24×7 सैटेलाइट इमेजरी, मौसम डेटा, NOTAM, ASHTAM और Volcanic Ash Advisory पर नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है, क्योंकि हवा में राख का फैलाव कभी भी दिशा बदल सकता है और सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
