न्यूज स्कूप : दुनिया की सबसे मूल्यवान और जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल (Apple) से छंटनी की खबरें सामने आई हैं। ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आईफोन बनाने वाली इस दिग्गज कंपनी में यह ले-ऑफ मुख्य रूप से सेल्स विभाग में किया गया है। कंपनी के इस कदम से एक बार फिर वैश्विक नौकरी बाजार में चर्चा तेज हो गई है।
एप्पल के प्रवक्ता ने इस खबर की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि कंपनी अपनी सेल्स टीम में बदलाव (Restructuring) कर रही है। प्रवक्ता के अनुसार, इस छंटनी को बिजनेस को और अधिक सुव्यवस्थित (Streamlining) करने के लिए एक जरूरी कदम बताया गया है।
यह छंटनी कई लोगों के लिए चौंकाने वाली है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है जब एप्पल का राजस्व (Revenue) लगातार बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी भविष्य की चुनौतियों से निपटने और परिचालन क्षमता (Operational Efficiency) बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से अपनी टीमों को पुनर्गठित कर रही है।
कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि कितने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, लेकिन प्रवक्ता ने यह ज़रूर स्पष्ट किया कि दर्जनों लोगों को नौकरी से निकाला गया है। इस ले-ऑफ का सीधा प्रभाव सेल्स टीम पर पड़ा है।
रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार, इस छंटनी में उन कर्मचारियों को भी काम से निकाला गया है, जो पिछले 20 से 30 सालों से कंपनी का अभिन्न हिस्सा थे। इतने लंबे समय से कंपनी के साथ जुड़े अनुभवी कर्मचारियों को निकालना एक बड़ा और असामान्य फैसला माना जा रहा है।
इसके अलावा, छंटनी की तलवार मुख्य रूप से उन अकाउंट मैनेजरों पर भी चली है, जो सरकारी एजेंसियों और बिजनेस स्कूल जैसे क्षेत्रों के साथ काम कर रहे थे। कुछ विशेषज्ञों द्वारा इस छंटनी को अमेरिका में चल रहे संभावित सरकारी शटडाउन से भी जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि कंपनी ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की है। वहीं, दूसरी ओर सेल्स टीम के लिए कुछ नए कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है।
कंपनी ने नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें फिर से जॉब में वापस लौटने का एक मौका दिया है। निकाले गए कर्मचारी कंपनी के भीतर दूसरी पोस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कर्मचारियों को नौकरी से निकालने से 15 दिन पहले इसकी जानकारी दी गई थी। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस छंटनी का असर किन-किन अन्य विभागों पर होने वाला है। इस घटना ने एक बार फिर टेक उद्योग में नौकरी की अस्थिरता और पुनर्गठन के बढ़ते चलन को उजागर किया है।
