न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पिछले कुछ महीनों में कोडीन आधारित कफ सिरप की तस्करी का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क पकड़ा गया है। यह मामला न केवल अवैध बिक्री, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नशे के रूप में कफ सिरप के गलत इस्तेमाल की गंभीर चुनौती को भी उजागर करता है।
जांच में यह खुलासा हुआ है कि कई फर्जी फार्मा कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स के नाम पर हजारों बोतलें देश के अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी देशों तक गैरकानूनी तरीके से भेजी जा रही थीं। प्रशासन ने अब तक कई लाख बोतलें जब्त की हैं और दर्जनों एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इन कंपनियों पर बिना लाइसेंस के अवैध तरीके से सिरप बेचने, स्टॉक छुपाने और गलत दस्तावेज़ देने के आरोप लगे हैं।
इस पूरे मामले के बाद यह समझना जरूरी हो गया है कि कोडीन युक्त कफ सिरप का दुरुपयोग क्यों होता है और यह स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है।
कोडीन एक ओपिऑइड (Opioid) दवा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से दर्द को कम करने और लगातार आने वाली खांसी की समस्या में किया जाता है। मेडिकल भाषा में इसे कफ सप्रेसेंट (खांसी दबाने वाला) कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे मस्तिष्क के उस हिस्से पर असर करती है जो दर्द और खांसी के सिग्नल को नियंत्रित करता है।
चूंकि यह दवा आदत डालने वाली है, इसलिए डॉक्टर इसे खास मामलों में और अत्यंत सीमित मात्रा में ही देते हैं। लंबे समय तक या अधिक मात्रा में लेने पर शरीर इसकी आदत बना लेता है, जिससे धीरे-धीरे अधिक खुराक की आवश्यकता महसूस होती है। इसी कारण, कोडीन को नार्कोटिक ड्रग्स के अंतर्गत सख्ती से नियंत्रित किया जाता है।
दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि कोडीन कफ सिरप में इसलिए मिलाई जाती है क्योंकि यह खांसी को तुरंत शांत करने वाली प्रभावी दवा है। यह दिमाग के उस हिस्से पर असर करती है जो खांसी का सिग्नल भेजता है, जिससे सूखी और तेज खांसी में तुरंत राहत मिलती है।
लेकिन, डॉ. गिरि चेतावनी देते हैं कि इसका नुकसान इसकी फायदों से कहीं बड़ा है:
- लत और निर्भरता: कोडीन एक ओपिऑइड होने के कारण शरीर को अत्यधिक आराम और हल्की नींद जैसा असर देती है, जिससे इसे बार-बार लेने की तीव्र इच्छा पैदा होती है और व्यक्ति को इसकी लत लग सकती है।
- ओवरडोज का खतरा: लगातार सेवन से लत लगने के बाद जब उपयोगकर्ता अधिक मात्रा का सेवन करता है, तो ओवरडोज होने पर सांस धीमी पड़ सकती है, उलझन, बेहोशी, लो ब्लड प्रेशर और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है।
- उच्च जोखिम वर्ग: गर्भवती महिलाओं, बच्चों और पहले से बीमार लोगों में इसके साइड इफेक्ट और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं।
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि बाजार में कोडीन सिरप की बढ़ती तस्करी का मुख्य कारण इसका नशे की तरह इस्तेमाल होना है, जिससे युवा तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि ऐसी दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी और फर्जी कंपनियों के जरिए की जाने वाली सप्लाई को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।
