28 Feb 2026, Sat
Breaking

Himachal Offbeat: मंडी के पराशर ऋषि मंदिर और रहस्यमय झील की यात्रा; नए साल पर बर्फबारी देखने के लिए परफेक्ट यह ‘गुप्त खजाना’, जानें दिल्ली से कैसे पहुंचें

News Scoop

न्यूज स्कूप : हिमाचल प्रदेश को केवल “देवभूमि” ही नहीं, बल्कि “वीर भूमि” भी कहा जाता है। यह राज्य अपने घने देवदार के जंगलों, बर्फ से ढकी चोटियों और प्राचीन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। खासकर सर्दी के मौसम में, जब पहाड़ चारों तरफ से बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते हैं, तो दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश से लोग यहां की शांति और खूबसूरती का अनुभव करने पहुंचते हैं।

शिमला, मनाली, कुल्लू, डलहौजी, और कसोल जैसे प्रसिद्ध स्थलों के बीच, हिमाचल के मंडी जिले में एक प्राचीन और रहस्यमय स्थल है, जिसका नाम है पराशर ऋषि मंदिर। यह जगह अपनी अद्भुत वास्तुकला और शांत झील के लिए उन यात्रियों के लिए एक ‘गुप्त खजाना’ है, जो भीड़ से दूर शांति चाहते हैं।

पराशर ऋषि मंदिर: 13वीं सदी की पैगोडा शैली

पराशर ऋषि मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी में समुद्र तल से 2730 मीटर की ऊंचाई पर, खूबसूरत पराशर झील के किनारे स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है।

  • निर्माण और इतिहास: यह मंदिर 13वीं-14वीं शताब्दी में राजा बाण सेन द्वारा बनवाया गया था। कहा जाता है कि इस पूरे मंदिर को बनाने के लिए एकल देवदार पेड़ का उपयोग किया गया था।
  • वास्तुकला: यह मंदिर पिरामिड के आकार की पैगोडा-शैली में बना है। इस शैली की विशेषता है कि इसमें 3 से 4 मंजिलें होती हैं, जिनकी छतें एक के ऊपर एक होती हैं और ऊपर की ओर मुड़ी हुई होती हैं। मंदिर पर की गई बारीक़ लकड़ी की नक्काशी लोगों का ध्यान आकर्षित करती है, जो इसकी प्राचीनता और कलात्मकता को दर्शाती है।
  • देवता: मंदिर में मुख्य रूप से ऋषि पराशर की मूर्ति स्थापित है, साथ ही यहां भगवान विष्णु, शिव और महिषमर्दिनी देवी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

पराशर झील का रहस्य और मनमोहक दृश्य

पराशर झील विशाल पहाड़ियों, घने जंगलों और धौलाधर पर्वत श्रृंखला के बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरी हुई एक शांत जगह है। मंदिर के साथ पराशर झील के किनारे का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

इस झील की गहराई आज तक पता नहीं चल पाई है, यह बात इसे और भी रहस्यमय बनाती है। मंडी और कुल्लू जिलों के स्थानीय लोग यहां आस्था के साथ आते हैं। जून के महीने में यहां पर सरनौहाली मेला भी आयोजित किया जाता है।

कैसे पहुंचें पराशर, खासकर सर्दियों में?

अगर आप नए साल पर या दिसंबर से फरवरी के बीच बर्फबारी देखने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जगह एकदम परफेक्ट है।

  • स्थान: मंडी शहर से यह लगभग 50 किलोमीटर दूर है। यह दिल्ली से 430 किलोमीटर और चंडीगढ़ से 178 किमी की दूरी पर है।
  • सड़क मार्ग: मंडी से पराशर झील तक पहुंचने के लिए आप एचआरटीसी (HRTC) बस ले सकते हैं या अपनी कार/टैक्सी से जा सकते हैं। ध्यान रखें कि यहां तक पहुंचते समय सड़कें थोड़ी खड़ी और संकरी हो जाती हैं। इसलिए बस से पहुंचने में सामान्यतः 2 से 3 घंटे लग सकते हैं।
  • ट्रेन और हवाई यात्रा: मंडी के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। आप चंडीगढ़ तक ट्रेन ले सकते हैं और फिर मंडी के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं। हवाई मार्ग से कुल्लू स्थित भुंतर हवाई अड्डा (Bhuntar Airport) सबसे नज़दीक है, जहां से आप पराशर तक के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

यह प्राचीन स्थल प्रकृति, इतिहास और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है, जो हर पर्यटक को एक अविस्मरणीय अनुभव देता है।

By News Scoop Desk

News Scoop is a digital news platform that focuses on delivering exclusive, fast, verified and impactful stories to readers. Unlike traditional news portals that rely heavily on routine reports, a news scoop platform prioritizes breaking news, inside information, investigative leads, political developments, public interest stories and viral happenings fresh and first.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *