न्यूज स्कूप : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 36 साल पुराने, बहुचर्चित रुबैया सईद अपहरण केस के सिलसिले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह मामला जम्मू कश्मीर के राजनीतिक इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हुआ था, जब तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया था।
रुबैया सईद, जो वर्तमान में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की चीफ और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन हैं, के अपहरण के मामले में सीबीआई की यह कार्रवाई केंद्रीय जांच एजेंसी की चल रही ट्रायल प्रक्रिया का हिस्सा है। सीबीआई ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस संवेदनशील केस को अपने हाथ में लिया था।
यह घटना 1989 में हुई थी। रुबैया सईद का अपहरण जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) द्वारा अपने जेल में बंद मिलिटेंट्स की रिहाई के लिए दबाव बनाने हेतु किया गया था।
- रिहाई का सौदा: रुबैया सईद को अपहरण करने के 5 दिन बाद रिहा किया गया था। उस वक्त केंद्र में वीपी सिंह की सरकार थी, जिसने आतंकियों की मांग मानते हुए जेकेएलएफ के पांच आतंकियों को छोड़ने का बड़ा फैसला लिया था।
- रुबैया की वर्तमान स्थिति: रुबैया सईद अब तमिलनाडु में रहती हैं और इस केस में सीबीआई की महत्वपूर्ण गवाह भी हैं।
सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान शफ़ात अहमद शुंगलू पुत्र सैफ़-उद-दीन के रूप में हुई है, जो जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का पूर्व सदस्य रहा है।
- पहचान: शुंगलू श्रीनगर के पुराने शहर में हावल इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तारी के समय वह श्रीनगर के निशात इलाके के इश्बर में रह रहा था।
- कस्टडी: सीबीआई ने आरोपी शुंगलू को पुलिस स्टेशन निशात से अपनी कस्टडी में लिया है।
मामले के जानकार सूत्रों ने बताया कि यह गिरफ्तारी 1989 के किडनैपिंग केस में केंद्रीय जांच एजेंसी की चल रही कार्रवाई के हिस्से के तौर पर हुई है।
- मुख्य आरोपी: जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का चेयरमैन यासीन मलिक, जो उस समय आतंकी ग्रुप का कमांडर इन चीफ था, इस केस के मुख्य आरोपियों में से एक है और उसका भी ट्रायल चल रहा है।
- गवाह के रूप में रुबैया: रुबैया सईद ने कोर्ट के सामने यासीन मलिक की पहचान किडनैपर के तौर पर की है। हाल के सालों में इस केस में कई आरोपियों से पूछताछ की गई है, क्योंकि इसका ट्रायल नामित कोर्ट में चल रहा है।
यह गिरफ्तारी इस बात को दर्शाती है कि तीन दशक से अधिक पुराना यह मामला अभी भी कानूनी अंजाम तक पहुंचने की प्रक्रिया में है।
