न्यूज स्कूप : बिहार विधानसभा के 18वें सत्र का आज बहुभाषी और गरिमामयी माहौल में आगाज हुआ। इस महत्वपूर्ण सत्र में 235 नवनिर्वाचित विधायकों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह सत्र न केवल लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बिहार के जनप्रतिनिधि अपनी स्थानीय और संवैधानिक भाषाओं को कितना सम्मान देते हैं।
कुल 235 विधायकों में से 209 विधायकों ने हिंदी में शपथ ग्रहण की, जो सर्वाधिक रही। जबकि शेष 26 विधायकों ने मैथिली, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं में शपथ लेकर सदन में अपनी भाषाई विविधता को प्रदर्शित किया। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने किया, जिन्हें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पहले ही राजभवन में शपथ दिला दी थी।
शपथ ग्रहण समारोह में कई प्रमुख चेहरों ने अपनी मातृभाषाओं या संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त भाषाओं को चुना:
मिथिलांचल क्षेत्र के कुल 14 विधायकों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ ली। इन विधायकों ने न केवल अपनी भाषा को सम्मान दिया, बल्कि मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान की। मैथिली में शपथ लेने वालों में मैथिली ठाकुर (अलीनगर), नीतीश मिश्रा (झंझारपुर), विनोद नारायण झा (बेनीपट्टी), मीना कामत (बाबूबरही), माधव आनंद (मधुबनी) और सुधांशु शेखर (हरलाखी) समेत 8 अन्य विधायक शामिल थे।
संवैधानिक भाषाओं के प्रति सम्मान दिखाते हुए कुछ विधायकों ने संस्कृत और अंग्रेजी में शपथ ली।
- संस्कृत: कटिहार से BJP विधायक तारकिशोर प्रसाद, सोनबरसा से JDU के रत्नेश सदा और मुकेश कुमार ने संस्कृत में शपथ लेकर सबको आकर्षित किया।
- अंग्रेजी: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विष्णुदेव पासवान, बीजेपी के सिद्धार्थ सौरभ और जेडीयू के चेतन आनंद और राहुल सिंह समेत कुछ अन्य विधायकों ने अंग्रेजी में शपथ ली।
उर्दू में शपथ लेने वाले विधायकों में कांग्रेस के आबिदुर रहमान, मोहम्मद मुर्शिद आलम, कमरूल होदा और सरवर आलम शामिल रहे। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक अख्तरूल ईमान ने भी उर्दू भाषा में शपथ ग्रहण की।
शपथ ग्रहण समारोह के पहले दिन कुल 235 नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ली। सात विधायक अभी किसी कारणवश शपथ नहीं ले पाए हैं, जिन्हें विधानसभा के नियम के अनुसार, बाद में शपथ दिलाई जाएगी। इस बहुभाषी शपथ ग्रहण समारोह ने यह सुनिश्चित किया कि बिहार विधानसभा देश की विविधता और भाषा प्रेम को प्रदर्शित करने वाला एक मजबूत मंच बना रहे।
