20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर अब केवल फेफड़ों की बीमारी तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और खाने-पीने की आदतों पर भी असर डाल रहा है। हवा की गुणवत्ता बिगड़ने से लोग न केवल कम खा रहे हैं, बल्कि उन्हें खाने का पहले जैसा आनंद भी महसूस नहीं हो रहा है।

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांट और हेपेटो-बिलियरी सर्जरी विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. उषस्त धीर बताते हैं कि प्रदूषण में मौजूद हानिकारक तत्व शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे खानपान से जुड़ी कई तरह की असहजताएँ बढ़ रही हैं।

प्रदूषण से खाने का स्वाद और भूख क्यों होती है कम?

प्रदूषण भरे दिनों में कई लोगों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

  • स्वाद और रुचि में कमी: भोजन पहले जैसा स्वादिष्ट महसूस नहीं होता, जिससे खाने का आनंद और रुचि दोनों कम हो जाती हैं।
  • भूख घटना: पेट खाली होने पर भी खाना खाने का मन नहीं होता, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
  • मिचली या नॉज़िया: खासकर सुबह या बाहर से लौटने पर कई लोगों में मिचली या नॉज़िया की शिकायत बढ़ जाती है।

डॉ. उषस्त धीर के अनुसार, इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1. सूंघने की क्षमता का कम होना

प्रदूषण में मौजूद PM2.5, धुआं और केमिकल्स शरीर के अंदर जाकर नाक और गले को प्रभावित करते हैं। जब नाक की सूंघने की क्षमता कमजोर होती है, तो भोजन की सुगंध कम महसूस होती है। भोजन का स्वाद मुख्य रूप से उसकी सुगंध से जुड़ा होता है, और यही वजह है कि खाने का स्वाद भी हल्का लगने लगता है।

2. पाचन तंत्र में सूजन

प्रदूषित हवा पेट और आंतों में सूजन (Inflammation) बढ़ाती है। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे व्यक्ति को भूख कम लगने लगती है या खाना खाने का मन नहीं होता। डॉ. धीर बताते हैं कि हानिकारक कण शरीर में जमा होकर दिमाग तक उल्टी या भारीपन का संकेत भेजते हैं, जिससे नॉज़िया या मिचली की समस्या बढ़ जाती है।

प्रदूषण और गट माइक्रोबायोम का गहरा संबंध

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण का सबसे गहरा असर हमारे गट माइक्रोबायोम यानी पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पर पड़ता है। ये बैक्टीरिया पाचन, इम्यूनिटी और पूरा गट-ब्रेन सिस्टम संभालते हैं।

  • गट डिस्बायोसिस: जब हम प्रदूषित हवा में मौजूद धुआं और महीन कण (PM) सांस के साथ अंदर लेते हैं, तो ये धीरे-धीरे आंतों तक पहुँच जाते हैं। इससे अच्छे बैक्टीरिया की संख्या घटने लगती है और खराब बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। इस असंतुलन को गट डिस्बायोसिस कहा जाता है।
  • नतीजा: गट डिस्बायोसिस के कारण पाचन कमजोर होता है, भूख कम लगती है और पेट में भारीपन या असहजता महसूस होती है। गट और दिमाग के बीच सीधे जुड़ाव के कारण यह असंतुलन मूड, एनर्जी और नॉज़िया जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है।

प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से कैसे करें बचाव?

डॉ. धीर और अन्य विशेषज्ञों ने प्रदूषण के दिनों में स्वास्थ्य और पाचन को बनाए रखने के लिए कुछ ज़रूरी सुझाव दिए हैं:

  • इम्यूनिटी बूस्ट करें: हल्दी, अदरक, और विटामिन सी (Vitamin C) से भरपूर चीजों का सेवन करें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।
  • मास्क पहनें: बाहर निकलते समय हमेशा N95 या बेहतर गुणवत्ता वाला मास्क पहनें ताकि हानिकारक कणों को शरीर में जाने से रोका जा सके।
  • घर की हवा साफ रखें: घर की नियमित सफाई और वेंटिलेशन बनाए रखें, ज़रूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  • गट स्वास्थ्य बनाए रखें: दही, छाछ, फल और फाइबर वाले खाने का सेवन अधिक करें ताकि गट माइक्रोबायोम स्वस्थ रहे।
  • हाइड्रेशन: दिनभर खूब पानी पिएं ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें।

By News Scoop Desk

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