न्यूज स्कूप : 6 दिसंबर, शनिवार की सुबह भारतीय सर्राफा बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला, लेकिन सोने की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए निवेशकों को चौंका दिया। सोने की चमक जहां जबरदस्त तेजी के साथ बढ़ी है, वहीं चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिसने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है।
राजधानी दिल्ली में सोने ने एक नया मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है, जिसके पीछे मुख्य रूप से वैश्विक बाजार में अमेरिका की कमजोर आर्थिक स्थिति का हाथ है।
आज सुबह बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई।
- दिल्ली का भाव: राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव चढ़कर ₹1,30,090 प्रति 10 ग्राम हो गया, जो एक नया रिकॉर्ड है। वहीं, आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,19,260 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है।
- अन्य महानगरों का हाल: मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में भी तेजी बरकरार है, लेकिन भाव दिल्ली के मुकाबले थोड़े कम हैं। इन शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,29,940 और 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,19,110 प्रति 10 ग्राम चल रहा है। उत्तर भारत के प्रमुख शहरों जैसे जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में कीमतें लगभग दिल्ली के बराबर ही बनी हुई हैं।
अगला लक्ष्य ₹1.50 लाख! सेन्को गोल्ड के MD और CEO सुवंकर सेन का कहना है कि सोने की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। अगर ग्लोबल मार्केट का सपोर्ट मिलता रहा, तो सोना जल्द ही ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर भी पार कर सकता है।
जहां सोने में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई, वहीं चांदी ने आज खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। सोने की चाल से बिल्कुल उलट, 6 दिसंबर की सुबह चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
- घरेलू बाजार: घरेलू बाजार में चांदी लुढ़ककर ₹1,86,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
- वैश्विक बाजार: वैश्विक बाजार में भी चांदी का हाजिर भाव $58.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
चांदी में आई यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका हो सकती है जो इंडस्ट्रियल डिमांड या फिर चांदी के बर्तनों और सिक्कों में निवेश करने की सोच रहे थे।
सोने की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य कारण अमेरिका की आर्थिक स्थिति है।
- कमजोर रोज़गार डेटा: हाल ही में जारी हुए अमेरिकी रोज़गार (Payrolls) के आंकड़े बाजार को चौंकाने वाले थे। नवंबर महीने में पेरोल में बड़ी गिरावट आई है, जिसे साल 2023 के बाद का सबसे खराब डेटा माना जा रहा है।
- ब्याज दर कटौती की उम्मीदें: इस कमजोर डेटा ने यह आशंका बढ़ा दी है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
- सेफ हेवन एसेट: अर्थशास्त्र का नियम कहता है कि जब ब्याज दरें घटती हैं, तो बॉन्ड जैसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं और निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के तौर पर सोने की तरफ भागते हैं। यही कारण है कि सोने की मांग अचानक बढ़ गई है।
अब पूरी दुनिया की नजरें 9-10 दिसंबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मीटिंग पर टिकी हैं, जहां ब्याज दरों पर कोई बड़ा फैसला हो सकता है।
