न्यूज स्कूप : लोकसभा में सोमवार (8 दिसंबर 2025) को “राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने” के अवसर पर हुई चर्चा तीखी राजनीतिक जंग में बदल गई। इस चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर सीधा हमला बोला।
जवाब में, कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री पर चर्चा को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और भाजपा के राजनीतिक पूर्वजों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में दावा किया कि वंदे मातरम् को कमजोर करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए मुस्लिम लीग के दबाव में गीत के टुकड़े कर दिए गए।
- बंटवारे से जोड़ा: मोदी ने कहा, ‘‘कांग्रेस वंदे मातरम् के बंटवारे पर झुकी, इसलिए उसे एक दिन भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा।’’
- आपातकाल का जिक्र: उन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल का भी हवाला दिया और कहा कि जब राष्ट्रीय गीत के 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और संविधान का गला घोंट दिया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ तौर पर संकेत दिया कि कांग्रेस का नेतृत्व राष्ट्रवाद के प्रति उतना समर्पित नहीं था जितना भाजपा दर्शाती है।
प्रधानमंत्री मोदी के बाद चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के भाषण के दो प्रमुख उद्देश्य थे: चर्चा को राजनीतिक रंग देना और यह स्थापित करने का प्रयास करना कि सत्तापक्ष के राजनीतिक पूर्वज अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे।
- योगदान पर सवाल: गोगोई ने कहा, “भाजपा के राजनीतिक पूर्वजों का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा।”
- नेहरू पर बार-बार निशाना: उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी अपने हर वक्तव्य में कांग्रेस और नेहरू का बार-बार उल्लेख करते हैं। गोगोई ने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले प्रधानमंत्री ने सदन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान नेहरू का नाम 14 बार और कांग्रेस का नाम 50 बार लिया था।
- विरासत की रक्षा: गोगोई ने चुनौती देते हुए कहा, “आप जितनी कोशिश कर लें, आप (नेहरू) के योगदान पर एक भी काला दाग लगाने में सफल नहीं होंगे।”
गौरव गोगोई ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने ही सबसे पहले वंदे मातरम् का उद्घोष किया था और पार्टी ने अपने अधिवेशन में यह फैसला किया था कि हर आयोजन में इसे गाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय गीत का विरोध मुस्लिम लीग यह कहकर करना चाहती थी कि पूरे वंदे मातरम् का बहिष्कार करना चाहिए, लेकिन उस समय मौलाना अबुल कलाम आजाद ने स्वयं कहा था कि उन्हें वंदे मातरम् में कोई आपत्ति नहीं है। गोगोई ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की आलोचना करने वालों में मुस्लिम लीग के साथ-साथ हिंदू महासभा भी शामिल थी।
उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि भाजपा न तो बंगाल को समझ पाई और न ही इस राष्ट्र को समझ पाई है। यह चर्चा संसद में कांग्रेस और भाजपा के बीच विचारधारा और इतिहास की लड़ाई को दर्शाती है।
