20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हाल ही में संगठन चुनाव के माध्यम से केंद्र और प्रदेश स्तर पर नई लीडरशिप तैयार की है। पार्टी की यह नई रणनीति साफ तौर पर 2029 के आम चुनाव पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य अनुभवी मार्गदर्शन के साथ युवा ऊर्जा का तालमेल बिठाना है।

बीजेपी ने केंद्रीय और प्रदेश संगठन में उन नेताओं को तरजीह दी है, जिनकी उम्र 60 साल या उसके आसपास है, जबकि कई महत्वपूर्ण पदों पर युवाओं को भी मौका दिया गया है।

युवा नेताओं को मिली संगठन में तरजीह

बीजेपी ने प्रदेश स्तर पर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया है:

  • राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष: पार्टी ने 45 साल के नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है।
  • प्रदेश अध्यक्ष: पार्टी ने 50 प्रतिशत ऐसे अध्यक्ष बनाए हैं, जिनकी उम्र 55 साल से कम है।

उदाहरण:

नेता का नामपदउम्र (साल)
नितिन नबीनराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष45
बीवाई बीजेंद्र (कर्नाटक)प्रदेश अध्यक्ष50
महेंद्र भट्ट (उत्तराखंड)प्रदेश अध्यक्ष51
पीवीएन माधव (आंध्र प्रदेश)प्रदेश अध्यक्ष52
जगदीश विश्वकर्मा (गुजरात)प्रदेश अध्यक्ष52

अनुभवी संसदीय बोर्ड (टॉप लीडरशिप)

संगठन में बड़े और नीतिगत फैसलों के लिए बीजेपी संसदीय बोर्ड सर्वोच्च इकाई बनी हुई है।

  • औसत उम्र: संसदीय बोर्ड में शामिल नेताओं की औसत उम्र करीब 69 साल है।
  • प्रमुख सदस्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और बीएस येदियुरप्पा (82 साल, सबसे उम्रदराज नेता)।
  • यह अनुभवी बोर्ड युवा नेतृत्व को मार्गदर्शन प्रदान करने का काम करेगा।

मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र

बीजेपी शासित राज्यों में भी युवा और अनुभवी मुख्यमंत्रियों का संतुलन है।

  • बीजेपी मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र: 55 साल (14 राज्यों में सरकार)।
  • युवा सीएम: अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू (46), ओडिशा के मोहन मांझी (54)।
  • कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र: 63 साल (तुलना के लिए)।

सियासी मायने: 2029 पर सीधा फोकस

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूर्ण बहुमत से कुछ सीटों से चूक गई थी, जिसके बाद पार्टी 2029 के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इस संगठनात्मक बदलाव के बड़े सियासी मायने हैं:

  1. युवाओं को संदेश: नए, युवा नेताओं को प्रमुख पदों पर नियुक्त करके बीजेपी नए लोगों को यह संदेश दे रही है कि पार्टी में उनका भी फ्यूचर सुरक्षित है, जिससे नए कार्यकर्ताओं का जुड़ाव और बढ़ेगा।
  2. क्षेत्रीय समायोजन: राज्य स्तर पर नए नेताओं को उभारकर पार्टी की कोशिश है कि उसकी राजनीति में विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों का सही समायोजन हो सके।
  3. दीर्घकालिक सोच: अध्यक्ष का न्यूनतम कार्यकाल 3 साल का होता है। 55 साल की औसत उम्र वाले प्रदेश अध्यक्षों को तैयार करने का मतलब है कि ये नेता 2029 चुनाव और उसके बाद भी संगठन को मजबूती से संभाल सकेंगे।
  4. विस्तार नीति: 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने लगभग 10 करोड़ सदस्य बनाए, जिनमें से 2 करोड़ सदस्य पूर्णतः नए थे। युवा लीडरशिप इस विस्तार नीति को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाएगी।

By News Scoop Desk

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