20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने और सरकारी खजाने को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में 3 प्रतिशत तक हिस्सेदारी का विनिवेश करने का फैसला किया है। यह विनिवेश बिक्री पेशकश (OFS – Offer for Sale) के जरिए किया जा रहा है, जो बुधवार (17 दिसंबर 2025) से गैर-खुदरा निवेशकों (Non-Retail Investors) के लिए खुल गया है।

क्या है सरकार की योजना और फ्लोर प्राइस?

सरकार ने इस बिक्री के लिए एक आकर्षक न्यूनतम मूल्य तय किया है ताकि निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहे।

  • न्यूनतम मूल्य (Floor Price): आईओबी के ओएफएस के लिए न्यूनतम मूल्य ₹34 प्रति शेयर निर्धारित किया गया है।
  • बाजार मूल्य से तुलना: मंगलवार को बीएसई पर आईओबी का शेयर ₹36.57 पर बंद हुआ था। इस लिहाज से फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार भाव से करीब 7% डिस्काउंट पर रखा गया है।
  • फंड जुटाने का लक्ष्य: सरकार इस हिस्सेदारी बिक्री के माध्यम से लगभग ₹1,960 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।

शेयरों की संख्या और ‘ग्रीन शू’ विकल्प

बैंक द्वारा शेयर बाजार को दी गई सूचना के अनुसार, विनिवेश को दो चरणों में विभाजित किया गया है:

  1. मूल पेशकश (Base Issue): सरकार बैंक की 2 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 38.51 करोड़ शेयर बेचेगी।
  2. ग्रीन शू विकल्प (Over-subscription Option): यदि निवेशकों की ओर से अतिरिक्त मांग आती है, तो अतिरिक्त 1 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 19.25 करोड़ शेयर और बेचने का विकल्प खुला रखा गया है।
  3. कुल हिस्सेदारी: मिलाकर यह बैंक की चुकता इक्विटी पूंजी का कुल 3 प्रतिशत हिस्सा होता है। वर्तमान में चेन्नई स्थित इस बैंक में सरकार की 94.61 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें

  • गैर-खुदरा निवेशक: बुधवार (17 दिसंबर) से बोली लगा सकते हैं।
  • खुदरा निवेशक (Retail Investors): इनके लिए बिक्री पेशकश बृहस्पतिवार (18 दिसंबर) को खुलेगी।
  • कर्मचारियों के लिए कोटा: बैंक ने बताया कि करीब 1.5 लाख शेयर पात्र कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं, जो अधिकतम ₹5 लाख तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे।

क्यों जरूरी है यह विनिवेश? (SEBI के नियम)

यह विनिवेश मुख्य रूप से न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी (MPS) नियमों के अनुरूप है।

  • 25% नियम: पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी आम जनता (पब्लिक) के पास होना अनिवार्य है।
  • डेडलाइन: सेबी ने सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को इस नियम को पूरा करने के लिए अगस्त 2026 तक का समय दिया है।
  • अन्य बैंक: आईओबी के अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक (93.9%), यूको बैंक (91%) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (89.3%) में भी सरकार की हिस्सेदारी वर्तमान में 75% की तय सीमा से काफी अधिक है, जिनमें आने वाले समय में इसी तरह के ओएफएस देखे जा सकते हैं।

By News Scoop Desk

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