न्यूज स्कूप : संसद के शीतकालीन सत्र के बीच एक नया और गंभीर विवाद सामने आया है। बीजेपी ने बुधवार को एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आज़ाद संसद भवन के भीतर ई-सिगरेट (Vaping) का इस्तेमाल कर रहे थे। यह वीडियो बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
अमित मालवीय ने वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सांसद ने सदन के भीतर अपने हाथ में ई-सिगरेट छिपाकर उसे पीया। मालवीय ने अपने पोस्ट में कहा:
“संसद भवन के अंदर ई-सिगरेट पीना बिल्कुल अस्वीकार्य आचरण है और यह नियमों का साफ तौर पर उल्लंघन है। जिस सांसद पर अनुराग ठाकुर ने सदन के भीतर वेपिंग करने का आरोप लगाया था, वह कोई और नहीं बल्कि कीर्ति आज़ाद हैं।”
बीजेपी का कहना है कि ई-सिगरेट न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित भी है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी पंचायत के भीतर इसका उपयोग करना सुरक्षा और मर्यादा दोनों के साथ खिलवाड़ है।
इस विवाद की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी जब बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी।
- मर्यादा का उल्लंघन: ठाकुर ने पत्र में कहा कि संसद के भीतर एक सांसद द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग करना संसद की गरिमा के खिलाफ है।
- अनुशासनहीनता: उन्होंने इसे न केवल अनुशासनहीनता बताया, बल्कि एक प्रतिबंधित पदार्थ का सार्वजनिक इस्तेमाल भी करार दिया।
- कार्रवाई की मांग: अनुराग ठाकुर ने स्पीकर से आग्रह किया था कि सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए और संबंधित सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह पहली बार नहीं है जब इस सत्र में टीएमसी सांसदों के आचरण पर सवाल उठे हों। कुछ दिन पहले टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय भी संसद परिसर में सिगरेट पीते हुए कैमरे में कैद हुए थे।
- मंत्रियों ने टोका: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गिरिराज सिंह ने उन्हें सार्वजनिक रूप से इसके लिए टोका भी था।
- सौगत रॉय की दलील: जब विवाद बढ़ा, तो सौगत रॉय ने कहा कि वह खुले परिसर में सिगरेट पी रहे थे और इसे बेवजह बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल (सितंबर 2019) के दौरान स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए ई-सिगरेट के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री और विज्ञापन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी। कानूनन ई-सिगरेट का उपयोग और भंडारण करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
संसद के भीतर इस तरह की घटना सामने आने के बाद अब विपक्ष की ओर से कीर्ति आज़ाद और टीएमसी की प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं, लोकसभा सचिवालय इस मामले की जांच कर सकता है।
