15 Mar 2026, Sun
Breaking

न्यूज स्कूप : नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहरों में घर खरीदना या निवेश करना एक बड़ा फैसला होता है। हालांकि, इन शहरों में रियल एस्टेट का ढांचा दिल्ली या अन्य शहरों से थोड़ा अलग है। यहां खरीदारों को आमतौर पर फ्रीहोल्ड (Freehold) नहीं, बल्कि लीज़होल्ड (Leasehold) प्रॉपर्टी ही मिलती है। ऐसे में खरीदारों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि लीज़ का पैसा कब और कैसे देना होता है, और क्या अलॉटमेंट के बाद अथॉरिटी अपनी मर्जी से चार्ज बढ़ा सकती है?

लीज़ कितने साल की होती है और क्या है इसका मतलब?

भारत में ज़्यादातर सरकारी अथॉरिटी ज़मीन को 90 या 99 साल की लीज़ पर देती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक तय अवधि के बाद प्रॉपर्टी कानूनी रूप से सरकार को वापस करनी होती है, जब तक कि आप निर्धारित फीस देकर उसे फ्रीहोल्ड में कन्वर्ट न करा लें या लीज़ का नवीनीकरण न हो।

एकमुश्त भुगतान (OTLR) बनाम सालाना किराया

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लीज़ रेंट चुकाने के मुख्य रूप से दो विकल्प होते हैं:

  1. सालाना किराया: इसमें हर साल संपत्ति की एक तय राशि अथॉरिटी को देनी होती है।
  2. वन टाइम लीज़ रेंट (OTLR): इसमें खरीदार एक ही बार में पूरी लीज़ अवधि का भुगतान कर देता है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर लीज़ एकमुश्त प्रीमियम के आधार पर तय हुई है और डीड में सालाना किराए की शर्त नहीं है, तो सरकारी अथॉरिटी बाद में मनमाने तरीके से नए चार्ज लागू नहीं कर सकती। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत भी संपत्ति का अधिकार एक तय अवधि के लिए दिया जाता है, जिसका भुगतान एक बार में या समय-समय पर किया जा सकता है।

क्या अथॉरिटी बाद में चार्ज बढ़ा सकती है?

यह पूरी तरह से उस लीज़ डीड (Lease Deed) पर निर्भर करता है जिस पर अलॉटमेंट के समय हस्ताक्षर किए गए थे।

  • शर्तों का महत्व: यदि डीड में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अथॉरिटी समय-समय पर किराए की समीक्षा कर सकती है या उसे बढ़ा सकती है, तो वह ऐसा करने का हक रखती है।
  • बिना सहमति के बदलाव: यदि डीड में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और खरीदार ने OTLR दे दिया है, तो अथॉरिटी द्वारा अचानक नए चार्ज थोपना कानूनी रूप से गलत माना जाता है।

राजस्थान का ऐतिहासिक केस और कोर्ट का रुख

लीज़ रेंट को लेकर राजस्थान का एक मामला काफी चर्चित रहा है। वहां सरकार ने 99 साल की लीज़ अलॉट करने के तीन साल बाद एक नई लीज़ डीड पेश की और प्लॉट होल्डर्स से मार्केट वैल्यू का 5% सालाना किराया मांगना शुरू कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अलॉटमेंट के बाद सरकार एकतरफा तरीके से वित्तीय बोझ नहीं बढ़ा सकती।

निष्कर्ष: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी खरीदते समय अपनी लीज़ डीड के हर क्लॉज को ध्यान से पढ़ें। यदि आपने एकमुश्त भुगतान कर दिया है, तो आपकी स्थिति काफी मजबूत होती है। किसी भी विवाद की स्थिति में लीज़ डीड ही सबसे बड़ा कानूनी हथियार साबित होती है।

By News Scoop Desk

News Scoop is a digital news platform that focuses on delivering exclusive, fast, verified and impactful stories to readers. Unlike traditional news portals that rely heavily on routine reports, a news scoop platform prioritizes breaking news, inside information, investigative leads, political developments, public interest stories and viral happenings fresh and first.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *