न्यूज स्कूप : हिंदू धर्म शास्त्रों, विशेषकर गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा, जीवन, मृत्यु, पाप-पुण्य और स्वर्ग-नरक के रहस्यों को अत्यंत विस्तार से समझाया गया है। अक्सर व्यक्ति नरक के नाम मात्र से ही भयभीत हो जाता है, क्योंकि वहां दी जाने वाली यातनाएं अत्यंत कष्टकारी बताई गई हैं। विडंबना यह है कि इन सजाओं के बारे में जानकर भी मनुष्य संसार के मोहजाल में फंसकर पाप कर्मों का त्याग नहीं कर पाता।
वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने हाल ही में अपने प्रवचनों के दौरान उन लक्षणों पर प्रकाश डाला है, जो किसी व्यक्ति के नरकगामी होने का संकेत देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति में इन सात लक्षणों में से एक भी मौजूद है, तो समझ लीजिए कि उसके पास ‘नरक का वीजा’ तैयार है।
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के अनुसार, निम्नलिखित प्रवृत्तियां व्यक्ति को नरक के कष्टों की ओर धकेलती हैं:
शास्त्रों में क्रोध को नरक का द्वार माना गया है। इंद्रेश जी के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को इतना भयंकर गुस्सा आता है जो दो घड़ी (लगभग 48 मिनट) से ज्यादा समय तक बना रहे, तो वह ‘अत्यंत कोप’ की श्रेणी में आता है। ऐसा क्रोध व्यक्ति की बुद्धि का नाश कर उसे नरक की ओर ले जाता है।
जो व्यक्ति सदैव कठोर और कड़वे वचन बोलता है, जिससे सामने वाले का हृदय छलनी हो जाए, वह पाप का भागी बनता है। वाणी से दूसरों को पीड़ा पहुंचाना और उनका दिल दुखाना मृत्यु के बाद आत्मा के लिए कष्टकारी होता है।
अपने ही सगे भाई-बहनों, माता-पिता और कुल के प्रति मन में ईर्ष्या, द्वेष और घृणा रखना नरक जाने का एक बड़ा कारण है। परिवार की जड़ों को काटने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता।
यहां दरिद्रता का अर्थ केवल धन की कमी नहीं, बल्कि ‘मानसिक दरिद्रता’ है। जो व्यक्ति जीवन में कभी संतुष्ट नहीं रहता और निरंतर लालच की आग में जलता रहता है, उसका स्थान नरक लोक में सुनिश्चित माना जाता है।
जो लोग अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करते हैं या उनके प्रति विद्वेष रखते हैं, ऐसे गलत व्यक्तियों को जो व्यक्ति आश्रय या शरण देता है, वह भी उनके पापों में बराबर का हिस्सेदार बन जाता है।
मांस का सेवन करने वाले, देशद्रोह करने वाले, अपने ही परिवार के साथ गद्दारी करने वाले और दूसरों के साथ छल-कपट की नीति अपनाने वाले व्यक्ति कभी नरक की आग से बच नहीं सकते।
गरुड़ पुराण के अनुसार, केवल पाप करना ही बुरा नहीं है, बल्कि पापियों का साथ देना भी उतना ही घातक है। वैश्या गमन करने वालों, मांस खाने वालों और छल करने वालों के साथ मित्रता रखने वाला व्यक्ति भी मृत्यु के बाद नरक लोक का भागी बनता है।
शास्त्रों का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि मनुष्य को सही मार्ग दिखाना है। इंद्रेश उपाध्याय जी कहते हैं कि यदि मनुष्य समय रहते अपनी इन आदतों को सुधार ले और सद्मार्ग पर चले, तो वह नरक के कष्टों से बचकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।
डिस्क्लेमर: इस न्यूज में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। न्यूज स्कूप इसकी पुष्टि नहीं करता है।
