न्यूज स्कूप : जैसे-जैसे साल 2025 अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, क्रिसमस और नए साल के जश्न की तैयारियां तेज हो गई हैं। डिजिटल दौर में त्योहारों का मतलब है—भारी डिस्काउंट, ऑनलाइन शॉपिंग और ढेरों उपहार। लेकिन आपकी इसी खुशी का फायदा उठाने के लिए साइबर अपराधी (Scammers) भी घात लगाए बैठे हैं।
आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद फ्रॉड इतने सटीक तरीके से किए जा रहे हैं कि एक समझदार व्यक्ति के लिए भी असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। आगामी छुट्टियों के सीजन में होने वाले कुछ प्रमुख स्कैम्स और उनसे बचने के तरीकों पर एक नजर:
सर्दियों के इस मौसम में पार्सल डिलीवरी की संख्या बढ़ जाती है। स्कैमर्स इसका फायदा उठाते हुए आपके पास एक एसएमएस (SMS) या व्हाट्सएप मैसेज भेजते हैं।
- कैसे होता है फ्रॉड: मैसेज में लिखा होता है— “आपका पार्सल डिलीवर नहीं हो सका, कृपया अपना पता अपडेट करें।” इसमें एक लिंक दिया होता है। लिंक पर क्लिक करते ही आप एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं, जहां ‘एड्रेस अपडेट’ करने के नाम पर आपकी बैंकिंग डिटेल्स (जैसे कार्ड नंबर और सीवीवी) मांग ली जाती हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल ऐसे मामलों में 100% की बढ़ोतरी देखी गई है।
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आपको लुभावने विज्ञापन दिख सकते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि क्रिसमस के मौके पर नामी कंपनियां फ्री गिफ्ट बांट रही हैं।
- कैसे होता है फ्रॉड: आपको बताया जाता है कि आपने एक आईफोन या महंगा गिफ्ट जीता है, बस आपको इसकी ‘शिपिंग फीस’ या ‘टैक्स’ के रूप में 99 या 199 रुपये देने होंगे। जैसे ही आप पेमेंट के लिए कार्ड डिटेल्स डालते हैं, स्कैमर्स आपका पूरा अकाउंट साफ कर देते हैं।
स्कैमर्स बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों (जैसे Amazon या Flipkart) जैसी दिखने वाली हूबहू क्लोन वेबसाइट बना लेते हैं।
- कैसे होता है फ्रॉड: इन वेबसाइट्स पर प्रोडक्ट्स की कीमत इतनी कम रखी जाती है कि कोई भी लालच में आ जाए। यूजर को लगता है कि वह असली साइट से खरीद रहा है, लेकिन पेमेंट करने के बाद न तो सामान मिलता है और न ही पैसा वापस आता है।
डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। इन बातों का खास ख्याल रखें:
- लिंक पर न करें क्लिक: किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज या ईमेल में दिए गए लिंक पर कभी क्लिक न करें। पार्सल ट्रैक करना है तो हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें।
- वेबसाइट की जांच: शॉपिंग करने से पहले वेबसाइट के URL को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि उसमें ‘https://’ और पैडलॉक (Lock) का निशान हो। अगर डिस्काउंट 90% से ज्यादा है, तो संभल जाएं।
- पर्सनल जानकारी न दें: कोई भी असली कंपनी आपसे फोन या मैसेज पर आपका ओटीपी (OTP), पिन (PIN) या पासवर्ड नहीं मांगती।
- पेमेंट का तरीका: अनजान या नई वेबसाइट पर शॉपिंग करते समय हमेशा ‘Cash on Delivery’ (COD) का विकल्प चुनें।
याद रखें, स्कैमर्स आपकी जल्दबाजी और लालच का इंतजार करते हैं। थोड़ा सा धैर्य और सतर्कता आपके त्योहार के आनंद को दोगुना कर सकती है।
