न्यूज स्कूप : बिहार का रोहतास जिला आज पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल बन गया है। इस जिले की खास बात यह है कि यहां प्रशासन के सर्वोच्च शिखर से लेकर राजनीति के मैदान तक, कमान महिलाओं के हाथों में है। रोहतास वर्तमान में बिहार का एकमात्र ऐसा जिला है जहां DM, SDM, विधायक, मेयर और डिप्टी मेयर जैसे पांच सबसे प्रभावशाली पदों पर ‘लेडी बॉस’ का राज चल रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासन को नई दिशा दे रही है, बल्कि राज्य की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गई है।
आइए जानते हैं उन पांच महिलाओं के बारे में जो आज रोहतास की तकदीर और तस्वीर बदल रही हैं।
रोहतास की 49वीं जिलाधिकारी के रूप में उदिता सिंह इतिहास रच रही हैं। 2014 बैच की आईएएस (IAS) अधिकारी उदिता सिंह इससे पहले जिले में डीडीसी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। आईआईटी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त उदिता अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और विकास योजनाओं की सटीक मॉनिटरिंग के लिए जानी जाती हैं। लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के साथ-साथ वे महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती हैं।
जिले की दूसरी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी डॉ. नेहा कुमारी हैं, जो सासाराम की एसडीएम (SDM) हैं। मधेपुरा की रहने वाली नेहा ने अंग्रेजी में पीएचडी की है और वे बीएचयू (BHU) की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं। 2023 में आईएएस बनने वाली नेहा की शैक्षणिक यात्रा और सादगी युवाओं, खासकर छात्राओं के लिए एक मिसाल है।
रोहतास विधानसभा सीट से इस बार स्नेहलता ने विधायक बनकर जिले की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को पुख्ता किया है। वे दिग्गज राजनेता और सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी हैं। पहली बार चुनावी मैदान में उतरने वाली स्नेहलता ने अपनी सूझबूझ और निर्णायक भूमिका से न केवल जीत हासिल की, बल्कि इलाके की महिलाओं के बीच यह संदेश भी दिया कि वे राजनीति के शीर्ष तक पहुंच सकती हैं।
सासाराम नगर निगम के इतिहास में पहली महिला मेयर बनने का गौरव काजल कुमारी को प्राप्त हुआ। एक कड़े मुकाबले में उन्होंने दिग्गज प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए जीत दर्ज की। मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद काजल ने अपनी क्षमता साबित की और आज वे शहर के विकास का रोडमैप तैयार कर रही हैं।
सासाराम नगर निगम की पहली महिला डिप्टी मेयर सत्यवंती देवी इस टीम की पांचवीं मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने अपने चुनाव में भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की। पूर्व उपमुख्यमंत्री परिषद चंद्रशेखर कुशवाहा की पत्नी होने के नाते राजनीति उन्हें विरासत में मिली, लेकिन अपनी कार्यकुशलता से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
एक ही जिले में पांच अहम पदों पर महिलाओं का होना इस बात का प्रमाण है कि बिहार में अब आधी आबादी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है। रोहतास का यह मॉडल पूरे राज्य के लिए एक अद्वितीय उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि जब महिलाओं को अवसर मिलता है, तो वे प्रशासन और शासन दोनों को बेहतर तरीके से चलाने का सामर्थ्य रखती हैं।
