19 Mar 2026, Thu
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न्यूज स्कूप : महिलाओं के शरीर में हर महीने मासिक धर्म या पीरियड्स आना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) का प्रमाण है। लेकिन आज की बदलती जीवनशैली और खानपान के बीच अनियमित पीरियड्स (Irregular Periods) एक आम समस्या बन गई है। कई बार पीरियड्स का कुछ दिन देरी से आना तनावपूर्ण हो सकता है, तो कभी यह हफ्तों या महीनों तक मिस हो जाता है।

अक्सर महिलाएं इसे यह सोचकर टाल देती हैं कि शायद यह काम के बोझ या कमजोरी की वजह से है। लेकिन क्या पीरियड्स का समय पर न आना वाकई किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत है? आइए आरएमएल (RML) हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. सलोनी चड्ढा से समझते हैं इस समस्या की पूरी हकीकत।

क्या पीरियड्स लेट होना हमेशा बीमारी है?

डॉ. सलोनी चड्ढा के अनुसार, पीरियड्स का समय से न आना हमेशा किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होता।

  • सामान्य देरी: यदि पीरियड्स 2-5 दिन लेट होते हैं और फिर सामान्य रूप से आ जाते हैं, तो यह चिंता का विषय नहीं है। यह अचानक आए मानसिक तनाव, यात्रा, या जीवनशैली में बदलाव के कारण हो सकता है।
  • कब सतर्क हों? यदि पीरियड्स का चक्र (Cycle) बार-बार 35 दिनों से ऊपर जा रहा है, या साल में 9 से कम बार पीरियड्स आ रहे हैं, तो यह अंदरूनी शारीरिक समस्याओं की ओर इशारा करता है।

इन बीमारियों का हो सकता है खतरा

डॉक्टर बताती हैं कि पीरियड्स की अनियमितता को नजरअंदाज करने पर शरीर में छिपी हुई कई बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं:

  1. PCOD/PCOS: पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आज की सबसे बड़ी समस्या है। इसमें ओवरी में छोटी गांठें बन जाती हैं, जिससे हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं और पीरियड्स रुक-रुक कर आते हैं।
  2. थायरॉइड (Thyroid): थायरॉइड ग्रंथि का कम (Hypo) या ज्यादा (Hyper) सक्रिय होना सीधे तौर पर मासिक धर्म को प्रभावित करता है।
  3. एनीमिया (Anemia): शरीर में खून की कमी होने पर भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ब्लीडिंग बहुत कम हो सकती है।
  4. हॉर्मोनल असंतुलन: शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का लेवल बिगड़ने से ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है।
  5. समय से पहले मेनोपॉज: कुछ मामलों में 40 की उम्र से पहले पीरियड्स बंद होना ‘प्रीमेच्योर मेनोपॉज’ का संकेत हो सकता है।

बचाव के तरीके और जीवनशैली में बदलाव

डॉ. चड्ढा का कहना है कि 80% मामलों में सही दिनचर्या अपनाकर पीरियड्स को नियमित किया जा सकता है:

  • पोषक आहार: अपनी डाइट में आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर चीजें शामिल करें। जंक फूड और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।
  • तनाव प्रबंधन: तनाव हॉर्मोन (Cortisol) पीरियड्स के चक्र को बिगाड़ता है। इसके लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें।
  • वजन पर नियंत्रण: मोटापा PCOD का सबसे बड़ा कारण है। नियमित 30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज वजन को संतुलित रखने में मदद करती है।
  • पर्याप्त नींद: शरीर के हॉर्मोनल फंक्शन को सही रखने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।

पीरियड्स की अनियमितता केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का आईना है। यदि आपको पीरियड्स में देरी के साथ पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, चेहरे पर अनचाहे बाल, या अचानक वजन बढ़ने जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं।

By News Scoop Desk

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