न्यूज स्कूप : बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने गुरुवार (25 दिसंबर 2025) को ढाका में अपनी वापसी का ऐलान किया। फरवरी 2026 में होने वाले आगामी आम चुनाव से ठीक पहले रहमान का यह संबोधन देश की भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
हालांकि, अपने भाषण में उन्होंने ‘नए बांग्लादेश’ के लिए एक ‘गुप्त प्लान’ होने का दावा तो किया, लेकिन कई संवेदनशील मुद्दों पर उनकी चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में नए सवालों को जन्म दे दिया है।
60 वर्षीय तारिक रहमान ने ढाका की सड़कों पर उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “मेरे पास अपने देश के लिए और अपने देश के लोगों के लिए एक ठोस योजना (Plan) है।” हालांकि, उन्होंने इस योजना का कोई विस्तृत खाका पेश नहीं किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि रहमान ने खुद को सीधे तौर पर ‘भावी प्रधानमंत्री’ के रूप में पेश करने के बजाय अपनी पारिवारिक विरासत पर जोर दिया। बता दें कि उनके पिता जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति रह चुके हैं और उनकी मां खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रही हैं।
तारिक रहमान के भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह था, जो उन्होंने नहीं कहा।
- हसीना का निर्वासन: भारत में शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भविष्य या उन पर चल रहे कानूनी मामलों पर रहमान ने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
- चुनाव से बाहर अवामी लीग: दिलचस्प बात यह है कि बीएनपी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टी, अवामी लीग को 2026 के चुनावों से बाहर रखा गया है। रहमान ने इसे लोकतंत्र की बहाली तो कहा, लेकिन अवामी लीग के नेताओं पर लगे प्रतिबंधों पर मौन साधे रखा।
बांग्लादेश में हाल के महीनों में हुई हिंसा, आगजनी और विशेष रूप से हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर तारिक रहमान ने सीधे तौर पर कोई निंदा नहीं की।
- उन्होंने एक समावेशी समाज की बात जरूर की, लेकिन पीड़ितों के प्रति कोई विशेष संवेदना व्यक्त नहीं की।
- आलोचकों का कहना है कि रहमान ने हालिया अस्थिरता के लिए कानून-व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कोई कड़ा संदेश देने से बचते नजर आए।
फरवरी में होने वाले चुनाव बांग्लादेश के इतिहास के सबसे विवादित चुनाव साबित हो सकते हैं। अवामी लीग के बाहर होने से बीएनपी के लिए रास्ता साफ नजर आ रहा है। तारिक रहमान ने अपने भाषण में 1971 के मुक्ति संग्राम और 2024 के छात्र आंदोलनों का हवाला देकर खुद को ‘लोकतांत्रिक संघर्ष का उत्तराधिकारी’ साबित करने की कोशिश की। 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी ने बीएनपी कार्यकर्ताओं में जोश तो भर दिया है, लेकिन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनीतिक समावेशिता (Inclusivity) पर उनके रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। क्या उनका ‘गुप्त प्लान’ बांग्लादेश को स्थिरता की ओर ले जाएगा या अस्थिरता का नया दौर शुरू होगा, यह फरवरी के चुनाव तय करेंगे।
