न्यूज स्कूप : छत्तीसगढ़ का औद्योगिक क्षेत्र तमनार शनिवार को युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। नई कोयला खदानों के आवंटन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के विरोध में पिछले कई दिनों से चल रहा ग्रामीणों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए इस आमने-सामने के संघर्ष में तमनार थाना प्रभारी (TI) कमला पुसाम ठाकुर और एसडीओपी (SDOP) समेत दर्जनों सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हालात को बेकाबू होते देख पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा सहित लगभग 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। फिलहाल समूचे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
विवाद की जड़ तमनार इलाके में प्रस्तावित नई कोयला खदानें हैं। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समाज का आरोप है कि प्रशासन बिना पूर्ण भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया पूरी किए, खदानों के लिए जनसुनवाई का नाटक कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों से उनके पर्यावरण और आजीविका को भारी नुकसान होगा।
घटनाक्रम का विवरण:
- शुक्रवार रात: आक्रोशित ग्रामीणों ने कोयला परिवहन कर रहे ट्रकों को रोककर चक्काजाम कर दिया।
- शनिवार दोपहर 12:00 बजे: पुलिस ने रास्ता साफ कराने के लिए कुछ ग्रामीणों को हिरासत में लेना शुरू किया।
- शनिवार दोपहर 02:00 बजे: जैसे ही हिरासत की खबर फैली, हजारों की संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया।
भीड़ इतनी उग्र थी कि पुलिस को संभलने का मौका तक नहीं मिला। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पत्थरबाजी की, बल्कि पुलिस के सरकारी वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया।
- गंभीर रूप से घायल: तमनार थाना प्रभारी निरीक्षक कमला पुसाम ठाकुर के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें और घायल SDOP को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है।
- बल प्रयोग: भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलते ही रायगढ़ पुलिस अधीक्षक (SP) अतिरिक्त कुमुक के साथ मौके पर पहुंचे। सुरक्षा के मद्देनजर पड़ोसी जिलों से भी रिजर्व पुलिस फोर्स बुलाई गई है।
- हिरासत: पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राधेश्याम शर्मा और करीब 100 अन्य लोगों को गिरफ्तार/हिरासत में लिया है।
- फ्लैग मार्च: पूरे क्षेत्र में धारा 144 जैसे प्रतिबंधात्मक कदम उठाने की तैयारी है और पुलिस प्रभावित गांवों में फ्लैग मार्च कर रही है।
- घेराबंदी: खदान क्षेत्र की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है।
तमनार की यह हिंसा विकास और विस्थापन के बीच चल रहे पुराने संघर्ष का नतीजा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे अपनी ‘जल, जंगल और जमीन’ किसी भी कीमत पर उद्योगपतियों को नहीं देंगे। वहीं, प्रशासन का तर्क है कि वह केवल कानून व्यवस्था बहाल करने और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल, घायलों की स्थिति और बढ़ती गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है।
