20 Feb 2026, Fri
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द लोकतंत्र : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बिजली विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने न केवल एक उपभोक्ता की नींद उड़ा दी है, बल्कि विभाग की डिजिटल प्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा के चिपियाना खुर्द तिगरी निवासी एक किसान को विभाग ने 222 करोड़ रुपये का बिजली बिल थमा दिया है। एक आम आदमी के लिए अरबों रुपये की यह राशि किसी बड़े झटके से कम नहीं थी।

मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पीड़ित ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की है, लेकिन फिलहाल उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

25 किलोवाट के कनेक्शन पर अरबों का बिल

चिपियाना खुर्द निवासी विपिन यादव के पास 1000 वर्ग मीटर का एक भूखंड है। उन्होंने यहां इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 25 किलोवाट का कमर्शियल चार्जिंग कनेक्शन लिया हुआ है। विपिन के अनुसार:

  • वे हर महीने नियमित रूप से अपना बिजली बिल जमा करते हैं।
  • हाल ही में जब उन्होंने बिजली विभाग के एक शिविर में अपना बिल चेक करवाया, तो पता चला कि उन पर 222 करोड़ रुपये का बकाया है।
  • ऑनलाइन पोर्टल पर भी बिल में भारी गड़बड़ी पाई गई, जहां केवल मई महीने का बिल दिख रहा था लेकिन बकाया राशि करोड़ों में दिखाई जा रही थी।

विपिन यादव ने बताया कि इतनी बड़ी रकम देखकर उनके पैर तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत इटेडा सबस्टेशन पहुंचे, लेकिन वहां अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय सिर्फ ‘सुधार कराने’ की बात कहकर टाल दिया।

किसान यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी

प्रशासनिक उदासीनता से निराश होकर विपिन यादव ने भारतीय किसान यूनियन से मदद की गुहार लगाई है। किसान यूनियन ने इस मामले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की है। यूनियन के नेताओं का कहना है कि यह विभाग की घोर लापरवाही है जो उपभोक्ताओं को मानसिक प्रताड़ना दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिल को ठीक नहीं किया गया, तो वे सबस्टेशन पर बड़ा आंदोलन करेंगे।

विभाग की सफाई: “सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ी”

मामला बढ़ने के बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। अधिशासी अभियंता शिवम त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि:

  1. यह बिल किसी मानवीय त्रुटि के बजाय सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ी (Technical Glitch) के कारण बना है।
  2. आमतौर पर ऐसे असामान्य बिल सिस्टम द्वारा अपने आप ‘होल्ड’ कर दिए जाते हैं, ताकि वे उपभोक्ता तक न पहुंचें।
  3. विभाग इस बिल को मैन्युअली चेक कर रहा है और उपभोक्ता को जल्द ही वास्तविक रीडिंग के आधार पर संशोधित बिल उपलब्ध कराया जाएगा।
  4. उन्होंने उपभोक्ता से धैर्य रखने और न घबराने की अपील की है।

उपभोक्ता क्या करें ऐसे मामलों में?

यदि आपको भी कभी ऐसा असामान्य बिल प्राप्त होता है, तो निम्नलिखित कदम उठाएं:

  • शिकायत दर्ज करें: तुरंत अपने नजदीकी सबस्टेशन या अधिशासी अभियंता कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
  • ऑनलाइन पोर्टल: विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत (Grievance) दर्ज करें।
  • टोल-फ्री नंबर: 1912 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं और कंप्लेंट नंबर लें।
  • भुगतान न करें: जब तक बिल संशोधित (Revise) न हो जाए, तब तक गलत राशि का भुगतान न करें।

डिजिटल इंडिया के दौर में बिजली विभाग के सॉफ्टवेयर में ऐसी बड़ी खामियां सरकारी दावों की पोल खोलती हैं। ₹222 करोड़ का बिल न केवल एक तकनीकी गलती है, बल्कि यह विभाग की लापरवाही का चरम स्तर है, जिसकी कीमत एक आम उपभोक्ता को मानसिक तनाव झेलकर चुकानी पड़ती है।

By News Scoop Desk

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