न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ (30 दिसंबर 2025/2026 की अवधि) के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘सनातन धर्म’ से ऊपर दुनिया में कुछ भी नहीं है।
इस अवसर पर अयोध्या की बदली हुई तस्वीर और राम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्षों को याद करते हुए सीएम योगी ने पिछली सरकारों की नीतियों को अयोध्या के प्रति ‘षड्यंत्रकारी’ करार दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या का अर्थ ही वह स्थान है जहां कभी युद्ध न हुआ हो, लेकिन कुछ लोगों ने अपनी कट्टरवादी मानसिकता से इसे युद्धभूमि बना दिया था। उन्होंने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा:
“पिछली सरकारों ने इस पावन अयोध्या को लहूलुहान किया था। पहले यहां जय श्री राम कहने पर लाठियां पड़ती थीं। कुछ लोगों ने अयोध्या के खिलाफ गहरा षड्यंत्र रचा था। लेकिन जब अयोध्या की सुरक्षा स्वयं बजरंगबली कर रहे हों, तो वहां कोई आतंकी कैसे घुस सकता था? ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै’ के घोष के साथ आज अयोध्या पूरी तरह सुरक्षित है।”
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 22 जनवरी 2024 को पीएम मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा कर अयोध्या से गुलामी का कलंक मिटाया था। हाल ही में 25 नवंबर 2025 को जब पीएम मोदी पुनः अयोध्या आए और भव्य राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज स्थापित किया, तो यह पूरे विश्व के सनातनी समाज के लिए गौरव का क्षण था।
सीएम ने संघर्षों को याद दिलाते हुए कहा:
- 1528 से 1992 तक का संघर्ष: राम भक्तों ने करीब 500 वर्षों तक हर 20 साल के अंतराल पर संघर्ष किया।
- बदली अयोध्या: 2017 से पहले यहां न बिजली थी, न पानी और न ही सुरक्षा। आज पूरी दुनिया के श्रद्धालु यहां आकर फलीभूत महसूस करते हैं।
- योजना का नाम: अब तो केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजना का नाम भी ‘श्री राम’ के नाम पर आधारित है।
इसी कार्यक्रम में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए हुआ संघर्ष और आंदोलन, आधुनिक विश्व इतिहास का सबसे बड़ा जन-आंदोलन था। यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना है।
| सुविधा | 2017 से पहले | आज (2025-26) |
| बिजली/पानी | अत्यंत अभाव | 24/7 निर्बाध आपूर्ति |
| सुरक्षा | भय और लाठीचार्ज का माहौल | अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा और CCTV निगरानी |
| श्रद्धालु | सीमित संख्या, अव्यवस्था | प्रतिदिन लाखों की संख्या, भव्य इंफ्रास्ट्रक्चर |
| पहचान | विवादित और उपेक्षित क्षेत्र | वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र |
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन न केवल राम मंदिर के संघर्ष की याद दिलाता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। अयोध्या अब न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि नए उत्तर प्रदेश के विकास का रोल मॉडल बनकर उभरी है।
