20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : साल 2026 का उदय धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी होने जा रहा है। हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। नए साल के पहले ही दिन भगवान शिव को समर्पित ‘प्रदोष व्रत’ और चंद्रमा के प्रिय ‘रोहिणी नक्षत्र’ का अद्भुत मेल हो रहा है।

यदि आप नए साल के पहले दिन किसी शुभ कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं या भगवान की विशेष पूजा-अर्चना का संकल्प ले रहे हैं, तो समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं 1 जनवरी 2026 का विस्तृत पंचांग और शुभ-अशुभ समय।

1 जनवरी 2026 का पंचांग विवरण

  • तिथि: त्रयोदशी (रात्रि तक)
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • मास: पौष
  • वार: गुरुवार (बृहस्पतिवार)
  • नक्षत्र: रोहिणी (रात्रि 10:45 तक, इसके बाद मृगशिरा)
  • योग: शुभ/शुक्ल योग
  • करण: कौलव/तैतिल
  • चंद्र राशि: वृषभ (पूरा दिन)
  • सूर्योदय: सुबह 07:14 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 05:35 बजे

शुभ और अशुभ मुहूर्त (Shubh & Ashubh Muhurat)

धर्म शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल में किया गया कार्य शुभ फल नहीं देता, वहीं अभिजीत मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य सफलता दिलाता है।

मुहूर्त का नामसमय (दोपहर/सुबह)महत्व
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:09 से 12:51 तकसबसे श्रेष्ठ समय (किसी भी कार्य के लिए)
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 05:36 से 06:24 तकध्यान, योग और पूजा के लिए सर्वोत्तम
राहुकालदोपहर 01:49 से 03:09 तकअशुभ समय (नए कार्य से बचें)
अमृत कालशाम 07:15 से 08:58 तकशुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम

प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा समय

नए साल के पहले दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत ‘गुरु प्रदोष’ कहलाएगा। गुरु प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं पर विजय और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • पूजा का शुभ समय: शाम 05:35 से रात 08:19 तक।
  • व्रत पारण: 02 जनवरी 2026, शुक्रवार की सुबह 06:41 के बाद।
  • धार्मिक लाभ: मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं, इस समय की गई पूजा सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

गुरुवार का चौघड़िया (Day Choghadiya)

  • शुभ (उत्तम): सुबह 06:40 से 07:59 तक
  • लाभ (उन्नति): दोपहर 11:55 से 01:14 तक
  • अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 01:14 से 02:32 तक
  • शुभ (सफलता): शाम 03:51 से 05:10 तक

राहुकाल पर विशेष ध्यान

1 जनवरी 2026 को राहुकाल दोपहर 01:49 बजे से शुरू होकर 03:09 बजे तक रहेगा। इस दौरान गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी या किसी भी नए व्यापारिक सौदे से बचना चाहिए। यदि कोई कार्य अत्यंत आवश्यक हो, तो उसे अभिजीत मुहूर्त में संपन्न करें।

2026 के पहले दिन रोहिणी नक्षत्र और प्रदोष व्रत का संयोग यह संकेत देता है कि यह वर्ष मानसिक शांति और धार्मिक उन्नति लेकर आएगा। भगवान शिव की आराधना के साथ नववर्ष का स्वागत करना आपके पूरे वर्ष को मंगलमय बना सकता है।

By News Scoop Desk

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