न्यूज स्कूप : धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में बन रहे देश के पहले अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे (Varanasi Ropeway) को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें रोपवे का गोंडोला (ट्रॉली) हवा में तेजी से झूलता हुआ नजर आ रहा है। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सुरक्षा पर सवाल उठाए, लेकिन वाराणसी के कमिश्नर एस. राजलिंगम ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए प्रोजेक्ट की असल स्थिति स्पष्ट की है।
कमिश्नर ने जनता को आश्वस्त किया है कि वायरल हो रहा वीडियो किसी तकनीकी खराबी का नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों को परखने के लिए किए जा रहे ‘स्विंगिंग टेस्ट’ का हिस्सा है।
कमिश्नर एस. राजलिंगम के अनुसार, रोपवे का काम अब अपने अंतिम चरणों में है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े परीक्षण किए जा रहे हैं।
- लोडिंग और स्विंगिंग ट्रायल: वर्तमान में कैंट से रथयात्रा के बीच गोंडोला की लोडिंग (वजन सहने की क्षमता) और स्विंगिंग (हवा में झूलने की क्षमता) का परीक्षण चल रहा है।
- भ्रामक वीडियो: कमिश्नर ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी ने इस तकनीकी परीक्षण का ‘मिसलीडिंग’ वीडियो डालकर भ्रम फैलाने की कोशिश की है। इससे डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह जानबूझकर किया जा रहा एक ‘स्ट्रेस टेस्ट’ है।
प्रोजेक्ट को देख रही एजेंसी NHLML ने सुरक्षा के लिए कई चरणों में टेस्टिंग प्लान तैयार किया है:
| चरण | समय सीमा | गतिविधि |
| पहला चरण | 25 जनवरी 2026 तक | 800 किलो के सैंड बैग्स के साथ लोड टेस्ट (6 मीटर/सेकंड की गति)। |
| दूसरा चरण | मार्च 2026 से | पूरे कॉरिडोर (कैंट से गोदौलिया) पर फुल लेंथ टेस्टिंग। |
| तीसरा चरण | अप्रैल 2026 | रथयात्रा से गोदौलिया के बीच रोप पुलिंग का काम। |
| अंतिम चरण | मई 2026 | विदेशी विशेषज्ञों की निगरानी में फाइनल सेफ्टी रन। |
वाराणसी रोपवे की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कमिश्नर ने बताया कि इसे आम जनता के लिए खोलने से पहले तीन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ अनिवार्य होगा:
- बर्थोलेट (Swiss Company): मुख्य निर्माण और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम की जांच।
- ऑस्ट्रियाई कंपनी: रोपवे सेफ्टी कंसल्टेंसी।
- स्पेनिश कंपनी: एक्सपर्ट रिव्यू और अप्रूवल।
इन विशेषज्ञों की निगरानी में इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम, ब्रेक सिस्टम और केबिन बैलेंसिंग (हिंज संतुलन) की सघन जांच की जा रही है।
वाराणसी के तीन मुख्य स्टेशनों पर 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। 10 में से 8 टावर लगाए जा चुके हैं। वर्तमान में ड्राइव स्टेशनों पर शोर कम करने (Noise Control) और इमरजेंसी बाईपास सिस्टम को मुख्य कंट्रोल रूम से जोड़ने का काम चल रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मई 2026 तक काशीवासी और पर्यटक हवा में तैरते हुए कैंट से गोदौलिया का सफर तय कर सकेंगे।
वाराणसी रोपवे न केवल काशी की ट्रैफिक समस्या का समाधान है, बल्कि यह आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना भी है। वायरल वीडियो से घबराने के बजाय, इसे सुरक्षा की कसौटी पर कसने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
