न्यूज स्कूप : केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत को लेकर कानूनी जंग तेज हो गई है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बुधवार, 7 जनवरी 2026 को उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई 8 जनवरी के लिए स्थगित कर दी है, जिसमें वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को चुनौती दी गई है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ इस संवेदनशील मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगी। वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे हैं, जबकि केंद्र और लद्दाख प्रशासन का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे हैं।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले साल सितंबर में लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
- हिंसा: 24 सितंबर को हुई इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और लगभग 90 लोग घायल हुए थे।
- हिरासत: हिंसा की इस घटना के दो दिन बाद, यानी 26 सितंबर को लद्दाख प्रशासन ने सोनम वांगचुक को हिंसा भड़काने के आरोप में रासुका (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया था। प्रशासन का तर्क है कि वांगचुक के बयानों ने भीड़ को उकसाया।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने अपनी संशोधित याचिका में लद्दाख प्रशासन की कार्रवाई को ‘अवैध और मनमाना’ करार दिया है। याचिका के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
| तर्क का विषय | याचिका का दावा |
| आधार | हिरासत ‘पुरानी एफआईआर और अटकलों’ पर आधारित है, जिसका वर्तमान घटना से सीधा संबंध नहीं है। |
| योगदान | 30 वर्षों से शिक्षा और पर्यावरण में योगदान देने वाले व्यक्ति को अचानक ‘खतरा’ बताना हास्यास्पद है। |
| हिंसा पर रुख | वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और इसे लद्दाख के लिए ‘दुखद दिन’ बताया था। |
| अधिकारों का हनन | रासुका का उपयोग सत्ता का घोर दुरुपयोग है, जो मौलिक संवैधानिक स्वतंत्रता पर प्रहार करता है। |
कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि वांगचुक हमेशा से शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि वांगचुक ने स्पष्ट रूप से संदेश दिया था कि हिंसा लद्दाख के पांच वर्षों के शांतिपूर्ण प्रयासों और ‘तपस्या’ को विफल कर देगी।
दूसरी ओर, सरकार का रुख है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कठोर कदम उठाना अनिवार्य था। इससे पहले 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से इस संबंध में जवाब मांगा था, जिसके लिए सॉलिसिटर जनरल ने समय का अनुरोध किया था।
गुरुवार को होने वाली सुनवाई यह तय कर सकती है कि सोनम वांगचुक को राहत मिलेगी या उनकी हिरासत जारी रहेगी। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है, बल्कि लद्दाख में चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलनों और राज्य में अभिव्यक्ति की आजादी के भविष्य के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।
सोनम वांगचुक की हिरासत पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। कल की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि क्या प्रशासन के पास उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं या उनकी गिरफ्तारी को केवल एक आंदोलन को दबाने की कोशिश माना जाएगा।
