न्यूज स्कूप : जैसे-जैसे 1 फरवरी 2026 की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे देश के करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों और नौकरीपेशा लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाने वाला यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक और निर्णायक होने वाला है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मौजूदा आयकर अधिनियम (Income Tax Act, 1961) के तहत पेश होने वाला यह आखिरी बजट है।
सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। ऐसे में आम आदमी उम्मीद कर रहा है कि नए कानून के दौर में प्रवेश करने से पहले सरकार इस बजट में राहतों की बौछार कर दे। आइए जानते हैं, किन प्रमुख मोर्चों पर इस बार टैक्सपेयर्स की नजरें टिकी हैं।
रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों और होम लोन की ईएमआई (EMI) के बोझ ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। वर्तमान में, आयकर की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये की छूट मिलती है।
- उम्मीद: करदाताओं की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 3 से 5 लाख रुपये किया जाए। घर खरीदारों का मानना है कि सिर्फ स्लैब बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि निवेश और खर्चों पर सीधी राहत जरूरी है।
पिछले कई सालों से धारा 80C की सीमा 1.5 लाख रुपये पर ही टिकी हुई है। इसी एक सीमा के भीतर पीएफ (PF), एलआईसी (LIC), बच्चों की ट्यूशन फीस और पीपीएफ (PPF) जैसे कई बड़े निवेश आते हैं।
- बचत का दायरा: मध्यम वर्ग चाहता है कि 80C की सीमा को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया जाए।
- बेसिक छूट: पुराने टैक्स सिस्टम में 2.5 लाख की बेसिक छूट को बढ़ाकर 5 लाख करने की मांग हो रही है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच हाथ में अधिक नकदी (Disposable Income) बच सके।
| मांग का विषय | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित/उम्मीद |
| धारा 80C सीमा | ₹1.5 लाख | ₹2.5 लाख |
| होम लोन ब्याज छूट | ₹2 लाख | ₹3.5 लाख से ₹5 लाख |
| बेसिक टैक्स छूट | ₹2.5 लाख (पुरानी व्यवस्था) | ₹5 लाख |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹1,00,000 |
अगले वित्त वर्ष से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट से सबसे बड़ी उम्मीद सरलता (Simplicity) की है। फिलहाल शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) के नियम इतने जटिल हैं कि आम आदमी के लिए उन्हें समझना मुश्किल होता है।
- टीडीएस और रिफंड: करदाता चाहते हैं कि टीडीएस (TDS) मिलान की दिक्कतों को दूर किया जाए और इनकम टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को और तेज बनाया जाए।
- एक समान नियम: निवेश के अलग-अलग साधनों के लिए टैक्स के नियम एक समान करने की उम्मीद है, ताकि करदाताओं को उलझन न हो।
बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि यह नए आर्थिक युग (Income Tax Act 2025) की प्रस्तावना भी होगा। यदि सरकार होम लोन और बचत सीमाओं में राहत देती है, तो इससे न केवल मध्यम वर्ग का जीवन आसान होगा, बल्कि बाजार में मांग भी बढ़ेगी जिससे अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
