न्यूज स्कूप : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार को गोवा के पोंगुइनिम स्थित आदर्श ग्राम अमोन में आयोजित भव्य ‘आदि लोकोत्सव’ पर्व-2025 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए लोक-सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि “भारत गाँवों का देश है और गाँव ही हमारी आत्मा हैं।” उन्होंने गोवा सरकार द्वारा पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने के कार्य की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के नायकों के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की।
- भगवान बिरसा मुंडा: सीएम साय ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे।
- रानी दुर्गावती: उन्होंने रानी दुर्गावती के शौर्य को याद करते हुए जबलपुर में निर्मित भव्य संग्रहालय का उल्लेख किया।
- छत्तीसगढ़ के नायक: छत्तीसगढ़ के 32% जनजातीय आबादी का जिक्र करते हुए उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर और गेंद सिंह के बलिदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने गौरव के साथ बताया कि छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है।
- खासियत: यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन पीएम मोदी ने किया था।
- आमंत्रण: उन्होंने लोकोत्सव में मौजूद लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस आधुनिक संग्रहालय को देखने का न्यौता दिया, जहाँ जनजातीय वीरों की गाथाओं को अत्याधुनिक तकनीक से सहेजा गया है।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की बदलती छवि पर जोर देते हुए कहा कि राज्य अब नक्सलवाद के साये से बाहर निकल चुका है।
- शांति और विकास: उन्होंने कहा कि अब नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और जिन क्षेत्रों में पहले डर का माहौल था, वहां अब उद्योग लग रहे हैं।
- औद्योगिक क्रांति: नई औद्योगिक नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
- रोजगार: इन निवेशों से राज्य के आर्थिक भविष्य को नई दिशा मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे।
‘आदि लोकोत्सव’ के मंच से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दी, बल्कि राज्य के विकास और जनजातीय गौरव के नए प्रतिमानों को भी मजबूती से रखा।
