20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : डिजिटल युग में मोबाइल और लैपटॉप अब हमारी जरूरत बन चुके हैं। वर्क-फ्रॉम-होम हो या ऑनलाइन पढ़ाई, हमारा ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने बीतता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्क्रीन के प्रति आपका यह लगाव आपको ‘टेक नेक’ (Tech Neck) और ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ (Digital Eye Strain) जैसी गंभीर समस्याओं की ओर धकेल रहा है?

अक्सर हम काम की धुन में यह भूल जाते हैं कि घंटों गर्दन झुकाकर मोबाइल देखना या गलत तरीके से बैठकर लैपटॉप चलाना हमारे शरीर पर क्या असर डाल रहा है। शुरुआत में हल्का लगने वाला यह दर्द धीरे-धीरे सर्वाइकल (Cervical) और आंखों की रोशनी कम होने जैसी बीमारियों का रूप ले सकता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट की राय और उन आदतों के बारे में जिन्हें सुधारना आज के समय में बेहद जरूरी है।

एक्सपर्ट की राय: क्यों बढ़ रहा है दर्द?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, गर्दन और आंखों के दर्द का मुख्य कारण हमारा गलत ‘पोस्चर’ और ‘लगातार स्क्रीन टाइम’ है। जब हम गर्दन झुकाकर फोन देखते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। साथ ही, स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) आंखों की नमी को सोख लेती है, जिससे जलन और भारीपन शुरू हो जाता है।

नज़रअंदाज करने पर हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

यदि आप गर्दन की जकड़न और आंखों की थकान को हल्के में ले रहे हैं, तो सावधान हो जाएं:

  1. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस: गर्दन की हड्डियों और डिस्क में खिंचाव आने से स्थाई दर्द की समस्या।
  2. ड्राई आई सिंड्रोम: आंखों में प्राकृतिक नमी खत्म होना, जिससे धुंधलापन और खुजली बढ़ जाती है।
  3. क्रोनिक सिरदर्द: आंखों पर दबाव और गर्दन की नसों में खिंचाव से बार-बार माइग्रेन जैसा सिरदर्द होना।
  4. स्लीप डिसऑर्डर: स्क्रीन की रोशनी नींद के हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ को प्रभावित करती है, जिससे अनिद्रा और तनाव बढ़ता है।

स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये 5 छोटी आदतें

  • सही कुर्सी-मेज का चुनाव: काम करते समय ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जो आपकी पीठ को सहारा दे। लैपटॉप को स्टैंड पर रखें ताकि वह आपकी आंखों के ठीक सामने हो।
  • नियमित ब्रेक: हर एक घंटे के काम के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें। इस दौरान अपनी गर्दन को धीरे-धीरे चारों दिशाओं में घुमाएं।
  • पलकें झपकाना न भूलें: स्क्रीन देखते समय हम पलकें झपकाना भूल जाते हैं। जानबूझकर बार-बार पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
  • हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त पानी पीने से शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है और आंखों का सूखापन कम होता है।
  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें।

मोबाइल और लैपटॉप सुविधा के लिए हैं, बीमारी के लिए नहीं। डॉ. घोटेकर की सलाह मानकर यदि आप आज ही अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करते हैं, तो भविष्य में आप फिजियोथेरेपी और चश्मे के भारी नंबर से बच सकते हैं।

By News Scoop Desk

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