20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सुगबुगाहट के बीच मतदाता सूची (Voter List) के गहन पुनरीक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट रोल (Draft Roll) जारी होने के बाद, अब आपत्तियों और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़े एक बेहद दिलचस्प सियासी और सामाजिक ट्रेंड की ओर इशारा कर रहे हैं।

जनवरी के दूसरे सप्ताह (7 जनवरी से 11 जनवरी) के दौरान यह देखा गया कि मतदाता अब राजनीतिक दलों के भरोसे बैठने के बजाय सीधे खुद आवेदन करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जहाँ राजनीतिक दलों के बीएलए (BLA) के माध्यम से आने वाले दावे हजारों में सिमटे हैं, वहीं आम जनता के सीधे आवेदनों की संख्या लाखों तक पहुँच गई है।

राजनीतिक दलों की भागीदारी: भाजपा सबसे आगे, सपा-बसपा पीछे

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में नियुक्त 5,76,611 बीएलए के माध्यम से नाम जोड़ने की प्रक्रिया धीमी रही। शुरुआती पांच दिनों का लेखा-जोखा कुछ इस प्रकार है:

तारीखकुल दावे (दलों द्वारा)भाजपा (BJP)सपा (SP)बसपा (BSP)कांग्रेस (INC)
7 जनवरी128105061700
8 जनवरी1,1701,121261904
9 जनवरी1,3341,214821919
10 जनवरी1,796
11 जनवरी1,9191,45826810885

खास बात: इस पूरी अवधि के दौरान किसी भी राजनीतिक दल ने मतदाता सूची से नाम हटाने का एक भी दावा पेश नहीं किया, जबकि सार्वजनिक रूप से भाजपा और सपा एक-दूसरे पर ‘फर्जी मतदाता’ शामिल करने का आरोप लगाते रहे हैं।

आम मतदाताओं का ‘सेल्फ-भरोसा’: आवेदनों में ऐतिहासिक उछाल

आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू आम नागरिकों द्वारा सीधे किए गए आवेदन हैं। 7 जनवरी को शून्य से शुरू हुआ यह सफर 11 जनवरी तक लाखों में पहुँच गया:

  • 8 जनवरी: अचानक सक्रियता बढ़ी और 30,663 सीधे आवेदन दर्ज हुए।
  • 9 जनवरी: संख्या बढ़कर 32,290 हो गई।
  • 10 जनवरी: आवेदनों में 3 गुना उछाल आया और 92,456 लोगों ने फॉर्म भरे।
  • 11 जनवरी: यह आंकड़ा अब तक के उच्चतम स्तर 1,26,984 पर पहुँच गया।

निर्वाचन आयोग की अपील

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों का नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है या जिनमें सुधार की आवश्यकता है, वे 12 जनवरी 2026 के बाद भी निर्धारित समय सीमा तक ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। राजनीतिक दलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने बीएलए के माध्यम से प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने में सहयोग करें।

यूपी का यह ‘वोटर ट्रेंड’ बताता है कि लोकतंत्र में नागरिक अब अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर हो रहे हैं। यह राजनीतिक दलों के लिए भी एक संकेत है कि उन्हें जमीनी स्तर पर मतदाताओं से सीधे जुड़ाव बनाने के लिए अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करना होगा।

By News Scoop Desk

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