20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : आगामी यूनियन बजट 2026, जो 1 फरवरी को पेश होने वाला है, उसे लेकर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। इस बीच, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने केंद्र सरकार को एक ऐसा क्रांतिकारी सुझाव दिया है, जो लागू होने पर लाखों परिवारों की किस्मत बदल सकता है। ICAI ने प्रस्ताव रखा है कि भारत में भी अमेरिका और जर्मनी की तर्ज पर पति-पत्नी को ‘ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ (Joint ITR) फाइल करने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

वर्तमान में, भारत में टैक्स की गणना व्यक्तिगत आधार पर होती है। लेकिन ICAI का मानना है कि ‘पारिवारिक इकाई’ (Family Unit) के आधार पर टैक्स लगाने से न केवल टैक्स का बोझ कम होगा, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी आएगी।

क्या है ज्वाइंट टैक्सेशन और इससे कैसे होगी बचत?

फिलहाल भारत में पति और पत्नी को अपनी कमाई पर अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। यदि परिवार में केवल पति कमाता है और पत्नी गृहणी हैं, तो परिवार को केवल एक व्यक्ति की ही बेसिक टैक्स छूट (Standard Deduction) का लाभ मिलता है।

  • टैक्स स्लैब का फायदा: ज्वाइंट टैक्सेशन में पति-पत्नी की आय को जोड़कर देखा जाता है। ICAI का सुझाव है कि इस स्थिति में बेसिक टैक्स छूट की सीमा को दोगुना कर देना चाहिए।
  • ₹8 लाख तक टैक्स फ्री आय: उदाहरण के तौर पर, अगर व्यक्तिगत छूट ₹4 लाख है, तो ज्वाइंट फाइलिंग में यह ₹8 लाख हो सकती है। इससे उन परिवारों को भारी बचत होगी जहाँ आय का स्रोत केवल एक सदस्य है, लेकिन जिम्मेदारी पूरे परिवार की है।

दुनिया के इन देशों में पहले से है यह सिस्टम

ICAI ने अपने सुझाव में अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का भी जिक्र किया है। कई विकसित देशों में परिवार को एक आर्थिक इकाई माना जाता है:

  1. अमेरिका: यहाँ ‘मैरिड फाइलिंग ज्वाइंटली’ (Married Filing Jointly) का विकल्प है, जिसमें टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ जाता है।
  2. जर्मनी और पुर्तगाल: यहाँ भी कपल्स के लिए ज्वाइंट रिटर्न की सुविधा है, जिससे उनकी कुल संयुक्त आय पर कम दर से टैक्स लगता है।
  3. फ्रांस: यहाँ ‘फैमिली कोशेंट’ सिस्टम चलता है, जहाँ परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर टैक्स का निर्धारण होता है।

ज्वाइंट ITR के संभावित लाभ: एक नजर में

फीचरवर्तमान सिस्टम (Individual)प्रस्तावित सिस्टम (Joint)
टैक्स छूटकेवल कमाने वाले सदस्य को लाभ।दोनों सदस्यों की बेसिक छूट जुड़ जाएगी।
टैक्स स्लैबज्यादा कमाई पर तुरंत हाई स्लैब (30%)।संयुक्त आय होने से स्लैब धीरे बढ़ेगा।
पारदर्शितालोग टैक्स बचाने के लिए बेनामी निवेश करते हैं।कागजी हेरफेर की जरूरत खत्म होगी।
सहूलियतदो अलग-अलग रिटर्न फाइल करने का झंझट।एक ही फॉर्म से पूरा काम आसान होगा।

गलत तरीकों और कागजी हेरफेर पर लगेगी लगाम

अक्सर देखा गया है कि टैक्स बचाने के लिए लोग अपनी संपत्ति या आय को पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर कर देते हैं (Income Splitting)। ICAI का कहना है कि मौजूदा सिस्टम लोगों को ऐसी ‘टैक्स प्लानिंग’ के लिए मजबूर करता है। अगर ज्वाइंट फाइलिंग का विकल्प मिलता है, तो लोग ईमानदारी से अपनी पूरी पारिवारिक आय दिखा सकेंगे और सरकार के पास ज्यादा स्पष्ट डेटा होगा।

बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें?

ICAI ने यह साफ किया है कि इस व्यवस्था को अनिवार्य बनाने के बजाय एक ‘विकल्प’ (Option) के रूप में पेश किया जाना चाहिए। यानी जो पति-पत्नी कामकाजी हैं और अलग-अलग रिटर्न भरना चाहते हैं, वे वैसा ही करते रहें। लेकिन जो परिवार ‘सिंगल अर्निंग’ पर हैं, उन्हें ज्वाइंट फाइलिंग से राहत मिले।

अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 में इस सुझाव को स्वीकार करती हैं, तो यह मिडिल क्लास के लिए अब तक का सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित होगा। इससे न केवल लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा बचेगा (Disposable Income), बल्कि निवेश और खपत में भी बढ़ोतरी होगी।

By News Scoop Desk

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