1 Mar 2026, Sun
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न्यूज स्कूप : सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना का विशेष महत्व है। जिस प्रकार किसी शुभ कार्य के लिए ‘मुहूर्त’ देखा जाता है, उसी प्रकार कुछ विशेष समय अवधियों को ‘अशुभ’ या ‘वर्जित’ माना जाता है। इन्हीं में से एक है पंचक। हर महीने आने वाले ये पांच दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

जनवरी 2026 में पंचक की शुरुआत होने वाली है। हालांकि, इस बार का पंचक अन्य महीनों की तुलना में थोड़ा अलग और खास है। पंचांग के अनुसार, इस बार ‘दोषरहित पंचक’ का संयोग बन रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जनवरी में पंचक कब शुरू हो रहा है और इस दौरान आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

जनवरी 2026 में पंचक का समय (Panchak Timings)

पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जनवरी माह में पंचक की अवधि इस प्रकार रहेगी:

  • पंचक शुरू होने की तिथि: 21 जनवरी 2026, बुधवार।
  • शुरुआत का समय: रात 01 बजकर 35 मिनट से।
  • पंचक समाप्त होने की तिथि: 25 जनवरी 2026, रविवार।
  • समाप्ति का समय: दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर।

चूंकि इस बार पंचक बुधवार के दिन शुरू हो रहा है, इसलिए इसे ज्योतिष शास्त्र में ‘दोषरहित पंचक’ की श्रेणी में रखा गया है।

क्या होता है पंचक और कैसे बनता है यह योग?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा पांच नक्षत्रों— धनिष्ठा (अंतिम चरण), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती —में गोचर करता है, तो उस समय को ‘पंचक’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन नक्षत्रों के प्रभाव में किए गए कुछ विशेष कार्यों का फल पांच गुना बढ़ जाता है, इसलिए अशुभ कार्यों को इस दौरान करने की सख्त मनाही होती है।

क्या है ‘दोषरहित पंचक’ का महत्व?

बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक को अक्सर दोषरहित माना जाता है।

  1. ईश्वरीय कृपा: यह समय भगवान श्री हरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव में होता है।
  2. शुभता का संचार: अन्य पंचकों (जैसे मृत्यु पंचक या अग्नि पंचक) की तुलना में यह कम हानिकारक होता है।
  3. अपवाद: दोषरहित पंचक में कई बार सामान्य शुभ कार्यों की अनुमति मिल जाती है, लेकिन फिर भी सावधानी के तौर पर भारी निर्माण और दक्षिण दिशा की यात्रा से बचा जाता है।

पंचक के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 काम

भले ही यह दोषरहित पंचक है, फिर भी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार निम्नलिखित कार्यों को वर्जित माना गया है:

  1. दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, पंचक में इस दिशा की यात्रा कष्टकारी हो सकती है।
  2. लकड़ी का संचय: पंचक के दौरान ईंधन के लिए लकड़ी इकट्ठा करना या लकड़ी का भारी सामान खरीदना अशुभ माना जाता है।
  3. घर की छत डलवाना: नए घर का निर्माण कर रहे हैं, तो पंचक के दौरान लेंटर या छत डलवाने का काम टाल देना चाहिए।
  4. घास और चटाई बुनना: पुराने समय से मान्यता है कि इस दौरान घास इकट्ठा करना या बिस्तर/चटाई बुनना अग्नि के भय को बढ़ाता है।
  5. अंतिम संस्कार में विशेष नियम: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो अंतिम संस्कार के समय पांच पुतले बनाकर साथ जलाने का विधान है ताकि पंचक दोष दूर हो सके।

पंचक के प्रकार और उनका प्रभाव

दिन (शुरुआत)पंचक का नामप्रभाव
सोमवारराज पंचकसरकारी कार्यों में सफलता (शुभ)
मंगलवारअग्नि पंचकआग का भय, निर्माण वर्जित (अशुभ)
शुक्रवारचोर पंचकधन हानि, यात्रा वर्जित (अशुभ)
शनिवारमृत्यु पंचकमृत्यु तुल्य कष्ट, जोखिम भरे काम वर्जित
रविवाररोग पंचकबीमारी और मानसिक तनाव का भय

जनवरी 2026 का पंचक बुधवार से शुरू होने के कारण बहुत अधिक नकारात्मक नहीं है, फिर भी शास्त्र सम्मत सावधानियां बरतना ही समझदारी है। यदि कोई अत्यंत अनिवार्य मांगलिक कार्य हो, तो 20 जनवरी से पहले संपन्न कर लें या किसी योग्य विद्वान पंडित से परामर्श लेकर ही कदम बढ़ाएं।

By News Scoop Desk

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