न्यूज स्कूप : ईरान में पिछले 19 दिनों से जारी भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शन और हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। ईरान के पुलिस चीफ ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को दावा किया कि देश भर में स्थिति अब नियंत्रण में है। हालांकि, इस शांति के पीछे तबाही और मौतों का एक भयावह मंजर छिपा है।
महंगाई और आर्थिक संकट से त्रस्त जनता ने 28 दिसंबर को सड़कों पर उतरकर जो विद्रोह शुरू किया था, उसने ईरान की नींव हिला दी है। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा में अब तक कुल 2,677 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 2,478 आम प्रदर्शनकारी और 163 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
19 दिनों के हिंसक संघर्ष ने ईरान को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से सालों पीछे धकेल दिया है।
- धार्मिक और सार्वजनिक स्थल: प्रदर्शनों के दौरान 30 प्रांतों में करीब 250 मस्जिदें और 20 धार्मिक केंद्रों को निशाना बनाया गया।
- बैंकिंग सेक्टर को चोट: ईरान के बैंकिंग ढांचे पर सबसे बुरा असर पड़ा है। 317 बैंक शाखाएं पूरी तरह तबाह हो गई हैं, जबकि 4,700 बैंकों को आंशिक नुकसान पहुँचा है। लगभग 1,400 एटीएम तोड़ दिए गए।
- परिवहन और बुनियादी ढांचा: अकेले तेहरान में सैकड़ों गाड़ियां जला दी गईं। एम्बुलेंस और फायर डिपार्टमेंट को हुए नुकसान की कीमत 5.3 मिलियन डॉलर आंकी गई है, जबकि बिजली क्षेत्र को 6.6 मिलियन डॉलर का चूना लगा है।
- शिक्षा और धरोहर: 265 स्कूल, 3 बड़ी लाइब्रेरी और 8 सांस्कृतिक स्थल भी इस आक्रोश की भेंट चढ़ गए।
ईरान में जारी नरसंहार को लेकर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया था। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिना लैविट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि खून-खराबा नहीं रुका तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
- सजा-ए-मौत पर रोक: ट्रंप के दबाव और वैश्विक कूटनीति का असर यह हुआ कि ईरान ने 800 लोगों की मौत की सजा फिलहाल रोक दी है।
- कूटनीतिक प्रयास: सऊदी अरब और कतर ने अमेरिका से बातचीत कर सैन्य हमले को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार को ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान में हिंसा कम हो रही है, जिससे प्रत्यक्ष युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है।
मध्य-पूर्व के इस संकट के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कमान संभाली है। पुतिन ने इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान से अलग-अलग फोन पर लंबी बातचीत की।
- पजेशकियान का दावा: ईरानी राष्ट्रपति ने पुतिन से बातचीत में इस अशांति का ठीकरा बाहरी ताकतों पर फोड़ते हुए कहा कि देश में फैले विद्रोह के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है।
- रूस की भूमिका: पुतिन ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है ताकि मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को रोका जा सके।
| श्रेणी | विवरण |
| कुल मौतें (HRANA के अनुसार) | 2,677 |
| नष्ट हुए बैंक | 317 (पूरी तरह तबाह) |
| शिक्षा केंद्रों को नुकसान | 265 स्कूल और 3 लाइब्रेरी |
| आर्थिक नुकसान (अनुमानित) | $12 मिलियन से अधिक (केवल बुनियादी ढांचा) |
ईरान में प्रदर्शन भले ही बंदूकों के जोर पर शांत करा दिए गए हों, लेकिन जनता के भीतर पनपा आर्थिक असंतोष और गुस्से की आग अभी बुझी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरानी सरकार सुधारों की दिशा में कदम उठाएगी या दमन का यह चक्र फिर से शुरू होगा।
