न्यूज स्कूप : जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित होने वाले ‘ड्रग-टेरर’ (Drug-Terror) नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और निर्णायक प्रहार किया है। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को ED के श्रीनगर जोनल ऑफिस ने ड्रग्स तस्करी के जरिए जुटाए गए धन और टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग ₹49 लाख की चल संपत्ति को कुर्क (Attach) कर लिया है।
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले अवैध वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करना है।
ED की जांच के अनुसार, कुर्क की गई यह राशि (कुल ₹48,99,500) मुख्य आरोपी अब्दुल मोमिन पीर की पत्नी, सैयद सादफ अंद्राबी के सेविंग्स बैंक अकाउंट में जमा थी।
- अपराध की कमाई: ED ने अपनी जांच में पाया कि यह पैसा पूरी तरह से मादक पदार्थों (ड्रग्स) की अवैध बिक्री के जरिए कमाया गया था।
- टेरर लिंक: जांच में स्पष्ट हुआ कि इस पैसे का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को खाद-पानी देने और सुरक्षाबलों के खिलाफ साजिश रचने में किया जाना था।
ED ने इस मामले में जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) द्वारा दर्ज की गई FIR और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी।
- 2020 की गिरफ्तारी: जून 2020 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अब्दुल मोमिन पीर को 6 किलो हेरोइन और ₹20 लाख नकद के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
- भारी बरामदगी: पीर की गिरफ्तारी के बाद जब NIA ने उसके रिश्तेदारों और सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से 15 किलो हेरोइन और ₹1.15 करोड़ नकद बरामद हुए।
- पारिवारिक नेटवर्क: जांच में खुलासा हुआ कि मोमिन पीर कोई नया अपराधी नहीं है। वह पहले भी दो बार ड्रग्स तस्करी में जेल जा चुका है और वह अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर एक संगठित ड्रग सिंडिकेट चला रहा था।
यह पहली बार नहीं है जब अब्दुल मोमिन पीर पर ED का शिकंजा कसा है।
- बेमिना हाउस अटैचमेंट: इससे पहले ED ने श्रीनगर के पॉश इलाके बेमिना में स्थित एक आलीशान मकान को भी कुर्क किया था। यह मकान पीर ने ड्रग्स की कमाई से अपनी पत्नी के नाम पर खरीदा था।
- नवंबर 2025 का अपडेट: इस मामले में ED ने नवंबर 2025 में कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी, जिसके बाद अब बैंक खातों पर यह कार्रवाई की गई है।
| विवरण | सांख्यिकी/जानकारी |
| ताजा जब्ती (कैश) | ₹48,99,500 (बैंक अकाउंट) |
| पहले बरामद हेरोइन | 21 किलो (कुल) |
| बरामद कुल कैश (अब तक) | ₹1.35 करोड़ से अधिक |
| मुख्य आरोपी | अब्दुल मोमिन पीर |
| जांच एजेंसियां | J&K पुलिस, NIA और ED |
जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियां अब ड्रग्स के जरिए होने वाली टेरर फंडिंग पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार (पाकिस्तान) से आने वाली ड्रग्स का पैसा सीधे घाटी में सक्रिय आतंकियों तक पहुँचता है। ED की इस कार्रवाई से ड्रग सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। फिलहाल, इस मामले में अन्य सहयोगियों और सफेदपोश मददगारों की पहचान के लिए जांच जारी है।
ED की यह कार्रवाई साबित करती है कि अपराधियों की संपत्ति अब सुरक्षित नहीं है। अवैध धंधों से जुटाया गया एक-एक रुपया अब सरकारी खजाने में जा रहा है, जिससे आतंक की आर्थिक जड़ें कमजोर हो रही हैं।
