20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी और अवैध वित्तीय लेन-देन के मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) पर अपना शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को ED ने जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष अदालत में चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) दाखिल की।

एजेंसी का आरोप है कि इस यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट ने न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल कैंपस की इमारतों के निर्माण में भी किया।

₹140 करोड़ की संपत्ति कुर्क: शिक्षा की आड़ में खेल?

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अटैच किया है।

  • विशाल कैंपस जब्त: फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित यूनिवर्सिटी की 58 एकड़ जमीन, प्रशासनिक इमारतें, विभिन्न विभागों के स्कूल और हॉस्टल इस जब्ती के दायरे में आए हैं।
  • वैधता पर सवाल: जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी के पास कई कोर्स संचालित करने के लिए आवश्यक वैध मान्यता (Accreditation) नहीं थी। इसके बावजूद, मासूम छात्रों से भारी-भरकम फीस वसूली गई, जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए डायवर्ट किया गया।

दिल्ली कार ब्लास्ट से जुड़ा कनेक्शन

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम तब सुर्खियों में आया जब केंद्रीय एजेंसियों ने 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम ब्लास्ट की जांच शुरू की।

  1. संदिग्ध फंडिंग: जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को संदेह हुआ कि यूनिवर्सिटी के फंड्स का इस्तेमाल असामाजिक गतिविधियों में किया गया हो सकता है।
  2. सघन जांच: ब्लास्ट के बाद हुई पड़ताल ने ED को यूनिवर्सिटी के बैंक ट्रांजैक्शंस और अकाउंट बुक्स की गहराई से जांच करने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद वित्तीय अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी केस: मुख्य बिंदु

विवरणसांख्यिकी/जानकारी
कुल अटैच संपत्ति₹140 करोड़
जमीन का क्षेत्रफल58 एकड़ (फरीदाबाद)
मुख्य आरोपीजवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह ट्रस्ट
आरोपधोखाधड़ी, अवैध फीस वसूली, फंड डायवर्जन
अहम कड़ीदिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट जांच

ED की अगली तैयारी

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआत है। एजेंसी को संदेह है कि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हुआ पैसा विदेशी फंडिंग या शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया था।

“छात्रों से ली गई फीस को यूनिवर्सिटी के विकास के बजाय व्यक्तिगत लाभ और अन्य संदिग्ध गतिविधियों के लिए डायवर्ट किया गया। हम मनी लॉन्ड्रिंग के वास्तविक सोर्स तक पहुँचने के लिए और भी संपत्तियों की जांच कर रहे हैं।” – ED सूत्र

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर हुई यह कार्रवाई शिक्षा जगत में सक्रिय उन संस्थानों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय अनियमितताएं कर रहे हैं। छात्रों के भविष्य और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले अब कानून की पकड़ से दूर नहीं हैं।

By News Scoop Desk

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