न्यूज स्कूप : भारतीय रसोई में ‘खिचड़ी’ को सबसे सरल और सुपाच्य भोजन माना जाता है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, हर क्षेत्र में इसे अलग-अलग अंदाज में बनाया जाता है। लेकिन एक बात जो लगभग हर घर में समान है, वह है शनिवार को खिचड़ी बनाने की परंपरा। आपने गौर किया होगा कि अधिकांश परिवारों में शनिवार का भोजन खिचड़ी ही होता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि सप्ताह के बाकी दिनों को छोड़कर केवल शनिवार को ही इसे इतना महत्व क्यों दिया जाता है? इसके पीछे न केवल स्वास्थ्य का विज्ञान छिपा है, बल्कि यह गहरा ज्योतिषीय महत्व भी रखता है। आइए जानते हैं आखिर शनिवार और खिचड़ी का क्या संबंध है।
विख्यात ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास बताते हैं कि शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को एक ‘मंद’ (धीमी गति वाला), भारी और उग्र ग्रह माना गया है।
- काली उड़द का महत्व: खिचड़ी में मुख्य रूप से काली उड़द की दाल का प्रयोग किया जाता है। ज्योतिष में काली उड़द का संबंध सीधे शनि ग्रह से माना गया है। शनिवार को इसका सेवन करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
- चावल का दान: खिचड़ी में चावल (चंद्रमा का प्रतीक) और काली उड़द (शनि का प्रतीक) का मेल होता है। जब इन दोनों को मिलाकर पकाया जाता है, तो यह ‘ग्रह बाधाओं’ को शांत करने में सहायक होता है।
- शनि दोष से मुक्ति: यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो शनिवार को खिचड़ी खाना और दान करना रामबाण उपाय माना जाता है।
ज्योतिष के अलावा, आयुर्वेद में भी शनिवार को खिचड़ी खाने का समर्थन किया गया है।
- सुपाच्य भोजन: सप्ताह भर गरिष्ठ और भारी भोजन करने के बाद, शनिवार को हल्का भोजन (खिचड़ी) पेट को आराम देता है।
- ऊर्जा का संतुलन: खिचड़ी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देती है और पाचन तंत्र को संतुलित रखती है। इससे मानसिक तनाव, अनिद्रा और शरीर की सुस्ती दूर होती है।
ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को खिचड़ी बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि इसका पूर्ण फल मिल सके:
- सामग्री: खिचड़ी में काली उड़द की दाल, चावल, थोड़ी मात्रा में हल्दी और मौसमी सब्जियां (जैसे गोभी, मटर, आलू) जरूर मिलाएं।
- तड़का: खिचड़ी में सरसों के तेल या शुद्ध घी का तड़का लगाएं। काले तिल का थोड़ा सा प्रयोग भी लाभकारी होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: इस खिचड़ी के सेवन से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि घर का माहौल भी सकारात्मक और शांत बना रहता है।
कई हिंदू परिवारों में शनिवार को केवल स्वयं खिचड़ी खाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि इसे दान करना भी अनिवार्य है। मान्यता है कि शनिवार को किसी जरूरतमंद या कोढ़ी को काली उड़द की खिचड़ी खिलाने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं और कानूनी अड़चनें दूर हो जाती हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है।
शनिवार को खिचड़ी खाना अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवनशैली और ज्योतिषीय सुरक्षा कवच का हिस्सा है। यह परंपरा हमें अनुशासन, सादगी और सेवा की भावना से जोड़ती है।
