न्यूज स्कूप : ईरान में पिछले 19 दिनों से जारी ऐतिहासिक और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद अब सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन हवाओं में तनाव अभी भी बरकरार है। शनिवार, 17 जनवरी 2026 को प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद प्रदर्शनों की तीव्रता में कमी आई है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी किए गए मौतों के आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं।
अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, इस आंतरिक संघर्ष में अब तक 3,090 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें से 2,885 आम प्रदर्शनकारी और शेष सुरक्षाकर्मी बताए जा रहे हैं। इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का सबसे घातक संघर्ष माना जा रहा है।
ईरान सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए लगभग आठ दिनों तक देश भर में इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया था।
- ब्लैकआउट खत्म: इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, करीब 200 घंटे के ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ के बाद शनिवार को कनेक्टिविटी में मामूली सुधार देखा गया है।
- मौजूदा स्थिति: वर्तमान में कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के सिर्फ 2% के आसपास है। तेहरान के नजदीकी शहर कराज में शनिवार तड़के इंटरनेट और SMS सेवाएं बहाल होने की खबरें मिली हैं। कराज वही इलाका है जहां हिंसा का स्तर सबसे अधिक था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते ईरान ने 800 से अधिक लोगों की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है।
“ईरान को पता है कि दुनिया की नजरें उस पर हैं। सजाओं को रोकना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन हम अभी भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।” – डोनाल्ड ट्रंप
हालांकि, ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने फांसी की सजा रद्द करने के दावों पर चुप्पी साधी हुई है। दूसरी ओर, सरकार ने ‘नाज़ानिन बरादरान’ नामक महिला सहित कई लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है, जिन पर विदेशी ताकतों के लिए जासूसी का आरोप है।
राजधानी तेहरान में पिछले चार दिनों से कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है, लेकिन शहर की सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात हैं।
- ड्रोन निगरानी: सुरक्षा बल पूरे शहर की ड्रोन से निगरानी कर रहे हैं।
- स्थानीय निवासियों का डर: तेहरान के निवासियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी इतनी अधिक है कि लोग बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
- सरकारी पक्ष: ईरान सरकार का कहना है कि वे आम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन ‘आतंकवादी दंगाइयों’ के खिलाफ लड़ रहे हैं जिन्हें अमेरिका और इजराइल का समर्थन प्राप्त है।
| श्रेणी | विवरण |
| कुल मौतें (HRANA के अनुसार) | 3,090 |
| इंटरनेट ब्लैकआउट की अवधि | 200+ घंटे |
| गिरफ्तारियां (अनुमानित) | 15,000 से अधिक |
| मुख्य केंद्र | तेहरान, कराज, मशहद |
| इंटरनेट स्थिति | आंशिक बहाली (2%) |
ईरान में चल रहे इस संकट ने वहां रह रहे भारतीय छात्रों और तीर्थयात्रियों को भी मुश्किल में डाल दिया है। इंटरनेट बंद होने के कारण वे पिछले आठ दिनों से अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। भारत सरकार ने तेहरान स्थित अपने दूतावास के जरिए नागरिकों को सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।
ईरान में फिलहाल शांति बंदूकों के दम पर कायम की गई नजर आती है। लेकिन 3,000 से अधिक मौतों और आर्थिक तबाही के बाद जनता के भीतर का गुस्सा कब फिर से फूट जाए, यह कहना मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।
