न्यूज स्कूप : आधुनिक युद्ध के मैदान में केवल फाइटर जेट्स का होना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि उन्हें समय रहते दुश्मन की सटीक जानकारी मिले। भारतीय वायुसेना (IAF) इसी दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रही है। भारत अपने AWACS (Airborne Warning and Control System) बेड़े का विस्तार करने के लिए मिशन मोड में काम कर रहा है। ये सिस्टम राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों के लिए ‘आसमान की आंख’ और ‘मास्टरमाइंड’ की तरह काम करते हैं।
AWACS एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर है। एक बड़े विमान के ऊपर लगा ताकतवर रडार दुश्मन के फाइटर जेट्स, ड्रोन्स और मिसाइलों को तब ही पकड़ लेता है जब वे अपनी सीमा के भीतर होते हैं।
- रियल टाइम डेटा: यह जानकारी तुरंत फाइटर जेट्स और ग्राउंड स्टेशनों को भेजी जाती है।
- लिमिटेशन: ग्राउंड रडार धरती की गोलाई (Earth’s curvature) के कारण कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों को नहीं देख पाते, लेकिन AWACS ऊंचाई से सब कुछ साफ़ देख लेता है। इसके बिना आज की एडवांस एयर वारफेयर जीतना नामुमकिन है।
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 6 सक्रिय AWACS सिस्टम हैं:
- 3 Phalcon AWACS: इजरायली तकनीक (EL/W-2090) और रूसी IL-76 विमान का संगम। यह 360 डिग्री कवरेज और 400 किमी से ज्यादा की रेंज देता है।
- 3 Netra Mk-1: पूरी तरह स्वदेशी (DRDO द्वारा निर्मित)। ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर विमान पर तैनात। यह 240 डिग्री कवरेज देता है और इसकी रेंज 250-375 किमी के बीच है।
एक आधुनिक AWACS सिस्टम बनाने की लागत लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये आती है, जो इसे वायुसेना का सबसे महंगा और कीमती हथियार बनाता है।
भारत चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए अपनी संख्या बढ़ा रहा है:
- Netra Mk-1A (6 नई यूनिट): मार्च 2025 में मंजूर इस प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा नेत्रा को अपग्रेड किया जाएगा। इसमें GaN (Gallium Nitride) आधारित रडार और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम होंगे।
- Netra Mk-2 (6 नई यूनिट): जुलाई 2025 में मंजूर इस मेगा प्रोजेक्ट की लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। ये एयरबस A321 विमान पर आधारित होंगे। इनकी खासियत इनका 300-360 डिग्री कवरेज और 400-500 किमी की मारक रेंज होगी। इनकी डिलीवरी 2026-27 से शुरू होने की उम्मीद है।
- Netra Mk-3: भविष्य में एयरबस A330 पर आधारित नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम बनाने की योजना है, जो भारत की निगरानी क्षमता को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर ले जाएगा।
| देश | AWACS की अनुमानित संख्या | मुख्य सिस्टम |
| चीन | ~60 | KJ-2000, KJ-500 |
| पाकिस्तान | ~12 | Karakoram Eagle (ZDK-03), Saab 2000 |
| भारत | 06 (मौजूदा) + 12 (पाइपलाइन में) | Phalcon, Netra |
| अमेरिका | ~30+ | E-3 Sentry |
ये सभी नए सिस्टम IACCS (Integrated Air Command and Control System) से जोड़े जाएंगे। इसका मतलब है कि जैसे ही AWACS किसी खतरे को देखेगा, वह जानकारी सीधे राफेल के कॉकपिट, नेवी के जहाजों और जमीन पर तैनात मिसाइल बैटरियों तक पहुँच जाएगी। इससे दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा।
भारत जिस गति से अपनी निगरानी क्षमता बढ़ा रहा है, वह हिंद महासागर और हिमालयी सीमाओं पर सुरक्षा की नई गारंटी है। स्वदेशी तकनीक पर जोर देकर भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि दुनिया को अपनी सैन्य इंजीनियरिंग का लोहा भी मनवा रहा है।
