20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में शांति बहाली की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति रंग लाती दिख रही है। ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने के लिए 8 प्रमुख इस्लामिक देशों ने अपनी आधिकारिक सहमति दे दी है। कतर की राजधानी दोहा में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर गाजा में स्थायी संघर्षविराम, पुनर्निर्माण और राजनीतिक स्थिरता के लिए इस वैश्विक पहल का समर्थन किया है।

यह बोर्ड गाजा सीजफायर के दूसरे चरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका मुख्य कार्य गाजा के लिए अस्थायी प्रशासन (Interim Administration), फंडिंग और निवेश का प्रबंध करना है।

इन 8 देशों ने दिया ट्रंप का साथ

दोहा में आयोजित बैठक के बाद जिन देशों ने बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है, उनमें शामिल हैं:

  1. कतर
  2. तुर्किये
  3. मिस्र
  4. जॉर्डन
  5. इंडोनेशिया
  6. पाकिस्तान
  7. सऊदी अरब
  8. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

बयान में कहा गया है कि ये सभी देश जल्द ही अपने-अपने देशों की कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। गौरतलब है कि मिस्र, पाकिस्तान और UAE ने इस बोर्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पहले ही जाहिर कर दी थी।

क्या होगा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का काम?

व्हाइट हाउस के अनुसार, खुद राष्ट्रपति ट्रंप इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे। बोर्ड के प्रत्येक सदस्य देश को विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, जैसे:

  • प्रशासनिक क्षमता: गाजा में स्थानीय शासन के ढांचे को मजबूत करना।
  • पुनर्निर्माण: युद्ध से तबाह हुए बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना।
  • निवेश: वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करना और विकास के लिए पूंजी जुटाना।
  • क्षेत्रीय संबंध: इजराइल और पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में सुधार लाना।

इजराइल की आपत्ति और तुर्किये का पेंच

भले ही 8 देश एक साथ आ गए हों, लेकिन इजराइल इस पहल से खुश नहीं है। इजराइली सरकार का कहना है कि अमेरिका ने यह बोर्ड बिना उनसे सलाह किए बनाया है। इजराइल को सबसे बड़ी आपत्ति तुर्किये की भागीदारी पर है।

  • इजराइल का आरोप: इजराइली मीडिया के मुताबिक, तुर्किये का रुख हमास के प्रति नरम रहा है। ऐसे में इजराइल को डर है कि तुर्किये की भागीदारी से गाजा में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ सकती है।

फंडिंग: क्या सदस्य बनने के लिए देने होंगे ₹8300 करोड़?

हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए देशों को 1 अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) की फीस देनी होगी। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

  • स्पष्टीकरण: व्हाइट हाउस ने कहा कि बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम ‘एंट्री फीस’ नहीं है। सदस्यता केवल उन देशों को दी जा रही है जो शांति और स्थिरता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा के भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश करता है। हालांकि इजराइल की आपत्तियां और फंडिंग के सवाल बड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन प्रमुख इस्लामिक देशों का एक साथ आना इस पहल को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करता है। आने वाले हफ्तों में इस बोर्ड के ढांचे में कुछ और नए सदस्यों के जुड़ने की संभावना है।

By News Scoop Desk

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