20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : वर्तमान समय में फिटनेस और सुडौल शरीर पाने की होड़ में हाई प्रोटीन डाइट (High Protein Diet) एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। चाहे जिम जाने वाले युवा हों या वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोग, हर कोई अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रहा है। सप्लीमेंट कंपनियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने यह धारणा बना दी है कि ‘जितना ज्यादा प्रोटीन, उतनी ज्यादा ताकत’। लेकिन क्या यह सच है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ यानी किसी भी चीज की अति नुकसानदेह होती है, और यही बात प्रोटीन पर भी लागू होती है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सर गंगाराम हॉस्पिटल की सीनियर डायटीशियन फारेहा शानम ने चेतावनी दी है कि बिना सोचे-समझे लिया गया अत्यधिक प्रोटीन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है।

क्या कहती हैं एक्सपर्ट फारेहा शानम?

डायटीशियन फारेहा शानम के अनुसार, प्रोटीन निस्संदेह मांसपेशियों के निर्माण और ऊतकों की मरम्मत के लिए जरूरी है, लेकिन शरीर को केवल प्रोटीन की नहीं, बल्कि एक बैलेंस्ड डाइट (संतुलित आहार) की आवश्यकता होती है।

“जब आप अपनी डाइट में सिर्फ प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित करते हैं और कार्ब्स, फैट, विटामिन्स व फाइबर को नजरअंदाज करते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन शरीर के अंगों पर अतिरिक्त बोझ डालता है, जिससे किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।”

जरूरत से ज्यादा प्रोटीन के 4 गंभीर नुकसान

यदि आप अपनी शारीरिक जरूरत से अधिक प्रोटीन का सेवन कर रहे हैं, तो आपके शरीर में ये समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं:

  1. किडनी पर अत्यधिक दबाव: प्रोटीन के टूटने पर यूरिया और नाइट्रोजन वेस्ट बनता है, जिसे किडनी फिल्टर करती है। प्रोटीन ज्यादा होने पर किडनी को ओवरटाइम काम करना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी फेलियर की नौबत आ सकती है और डायलिसिस तक कराना पड़ सकता है।
  2. डिहाइड्रेशन और थकान: शरीर प्रोटीन के कचरे को बाहर निकालने के लिए ज्यादा पानी का उपयोग करता है। यदि आप पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है।
  3. हड्डियों की कमजोरी (कैल्शियम लॉस): अधिक प्रोटीन के सेवन से शरीर में एसिड लोड बढ़ जाता है। इसे बेअसर करने के लिए शरीर हड्डियों से कैल्शियम खींचने लगता है, जिससे हड्डियां खोखली होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
  4. नर्व ब्लॉक और हार्ट अटैक: एक्सपर्ट्स के अनुसार, असंतुलित हाई प्रोटीन डाइट नसों में ब्लॉकेज पैदा कर सकती है और हृदय संबंधी रोगों (Heart Attack) के जोखिम को बढ़ा देती है।

कितना प्रोटीन है आपके लिए सही?

आरडी (RD) 2024 के मानकों के अनुसार, प्रोटीन का सेवन आपकी उम्र, वजन और फिजिकल एक्टिविटी पर निर्भर करता है:

  • सामान्य व्यक्ति के लिए: शरीर के प्रति किलो वजन पर 0.8 ग्राम प्रोटीन। (उदाहरण: यदि आपका वजन 60 किलो है, तो आपको 48 ग्राम प्रोटीन चाहिए)।
  • एथलीट या बॉडीबिल्डर: यदि आप भारी शारीरिक श्रम करते हैं या एथलीट हैं, तो यह मात्रा 1.2 से 2.0 ग्राम प्रति किलो तक हो सकती है।
  • शारीरिक मेहनत वाले काम: रिक्शा चलाने वाले या मजदूर वर्ग के लिए भी प्रोटीन की मांग सामान्य से अधिक होती है।

संतुलित आहार ही है सफलता की कुंजी

डायटीशियन शानम का कहना है कि मांसपेशियों के लिए केवल प्रोटीन पर्याप्त नहीं है। शरीर को ऊर्जा के लिए कार्ब्स, कोशिकाओं की सुरक्षा के लिए हेल्दी फैट्स और पाचन के लिए फाइबर की भी उतनी ही जरूरत है। सप्लीमेंट्स के बजाय प्राकृतिक स्रोतों जैसे दाल, पनीर, अंडे, और नट्स से प्रोटीन प्राप्त करना अधिक सुरक्षित है।

फिटनेस का मतलब सिर्फ प्रोटीन पाउडर पीना नहीं है। अपने शरीर की क्षमता को समझें और किसी भी डाइट प्लान को शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। याद रखें, आपकी सेहत आपकी थाली के संतुलन में छिपी है।

By News Scoop Desk

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