20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : देश की आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों की गाढ़ी कमाई और उनके भविष्य की जमा पूंजी पर डाका डालने वाले एक पूर्व अधिकारी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है। हैदराबाद जोनल टीम ने सीआईएसएफ (CISF) के पूर्व एएसआई रूप सिंह मीणा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हुए रंगारेड्डी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 जनवरी 2026 को चार्जशीट पर संज्ञान लिया। यह पूरी कार्रवाई तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में हुए बड़े हेरफेर के बाद शुरू हुई है।

कैसे किया ₹60 लाख का गबन?

जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी रूप सिंह मीणा हैदराबाद स्थित नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी अकादमी (NISA) के एनपीएस सेक्शन में तैनात था। पद पर रहते हुए उसके पास सीआईएसएफ कर्मियों के एनपीएस रिकॉर्ड्स और डेटा का पूरा एक्सेस था।

  • खाता नंबर बदलना: मीणा ने बड़ी चालाकी से सेवारत और इस्तीफा दे चुके जवानों के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) से जुड़े बैंक खातों को बदल दिया।
  • अवैध निकासी: असली खाताधारकों की जगह उसने अपनी पसंद के बैंक खातों की जानकारी फीड की और फिर ‘प्री-मैच्योर विड्रॉल’ (समय से पहले निकासी) की रिक्वेस्ट डाल दी।
  • कुल गबन: इस धोखाधड़ी के जरिए उसने कुल 60 लाख 26 हजार 321 रुपये की राशि जवानों के खातों से निकाल ली।

मनी लॉन्ड्रिंग का जाल: शादी से लेकर डेयरी बिजनेस तक

ईडी की जांच में पैसे के लेन-देन (Money Trail) को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

  1. खातों का दुरुपयोग: आरोपी ने इस काली कमाई को छिपाने के लिए अपने परिवार, दोस्तों और अनजान लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। कई लोगों को तो यह भी पता नहीं था कि उनके खातों में करोड़ों का फेरबदल हो रहा है।
  2. निजी निवेश: गबन की गई इस राशि का इस्तेमाल रूप सिंह मीणा ने अपनी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया। इसमें शादी के खर्च, चिकित्सा उपचार, पुराने कर्ज का भुगतान और यहाँ तक कि अपने डेयरी बिजनेस में निवेश करना भी शामिल था।

सीबीआई और ईडी की संयुक्त घेराबंदी

मामले की गंभीरता और केंद्रीय सुरक्षा बल से जुड़े होने के कारण इसकी जांच जून 2025 में सीबीआई (CBI), एंटी करप्शन ब्रांच, हैदराबाद को सौंपी गई थी।

  • संपत्ति जब्ती: ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोपी की चल और अचल संपत्तियों को पहले ही अटैच कर लिया है।
  • अस्थायी कुर्की: करीब 80,626 रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं और आगे की संपत्तियों की पहचान की जा रही है।

एनपीएस घोटाला: एक नजर में

विवरणजानकारी
मुख्य आरोपीरूप सिंह मीणा (पूर्व एएसआई, सीआईएसएफ)
कुल गबन राशि₹60,26,321
कार्यप्रणालीPRAN डेटा के जरिए बैंक खातों में बदलाव
जांच एजेंसियांईडी (ED), सीबीआई (CBI), तेलंगाना पुलिस
कोर्ट अपडेटचार्जशीट दाखिल, कोर्ट द्वारा संज्ञान (28 जन 2026)

सरकारी विभागों में बैठे अधिकारियों द्वारा डेटा का गलत इस्तेमाल सुरक्षा बलों के मनोबल पर चोट पहुँचाता है। ईडी और सीबीआई की यह संयुक्त कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। अब सबकी नजरें कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जिससे जवानों को उनकी मेहनत का पैसा वापस मिलने की उम्मीद जगी है।

By News Scoop Desk

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