19 Feb 2026, Thu
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न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव रेप कांड से जुड़े कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा अपनी 10 साल की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील पर प्रतिदिन (Daily Basis) सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके त्वरित निपटारे के लिए 11 फरवरी 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट में यह सुनवाई दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगी।

रोजाना सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूंकि कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को निलंबित (Suspend) करने की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है और मुख्य अपील के निपटारे में देरी हो रही है, इसलिए न्याय के हित में इस पर रोजाना सुनवाई करना आवश्यक है।

  • पक्ष-विपक्ष: सेंगर की ओर से वकील कन्हैया सिंघल पेश हुए, जबकि सीबीआई की ओर से वकील अनुभा भारद्वाज ने पक्ष रखा।
  • गंभीर अपराध: कोर्ट का मानना है कि हिरासत में मौत जैसे गंभीर अपराधों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पूरा किया जाना चाहिए।

क्या है कस्टोडियल डेथ का मामला?

यह मामला उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से संबंधित है।

  1. ट्रायल कोर्ट का फैसला: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य आरोपियों को इस मामले में दोषी पाया था और सभी को 10-10 साल की सजा सुनाई थी।
  2. आरोप: पीड़िता के पिता को अवैध हथियारों के झूठे मामले में फंसाया गया था और हिरासत के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी।
  3. सेंगर की दलील: कुलदीप सिंह सेंगर ने दलील दी है कि वह पहले ही करीब 9 साल की सजा काट चुका है और अब उसकी केवल 11 महीने की सजा शेष है।

केस टाइमलाइन और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

घटनाविवरण
सजाट्रायल कोर्ट ने सेंगर को 10 साल की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट जमानत23 दिसंबर को दिल्ली HC ने सेंगर को जमानत दी थी, जिस पर बवाल मचा।
सुप्रीम कोर्ट रोकसुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर तुरंत रोक लगा दी।
सुरक्षा चिंतापीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि सेंगर की रिहाई से परिवार को खतरा है।

‘सहानुभूति की कोई जगह नहीं’

सजा निलंबन की पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती। कोर्ट ने साफ कहा कि समाज और न्याय व्यवस्था को यह संदेश जाना जरूरी है कि वर्दी और रसूख की आड़ में किए गए अपराधों को बख्शा नहीं जाएगा।

11 फरवरी से शुरू होने वाली यह रोजाना सुनवाई कुलदीप सिंह सेंगर के राजनीतिक और कानूनी भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगी। पीड़िता का परिवार और पूरा देश इस फैसले का इंतजार कर रहा है ताकि न्याय की प्रक्रिया तार्किक अंजाम तक पहुंच सके।

By News Scoop Desk

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