न्यूज स्कूप : साल 2001 में मिसेज वर्ल्ड का खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली अदिति गोवित्रिकर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पेशे से डॉक्टर और सफल मॉडल-एक्ट्रेस अदिति ने ‘सोच’, ’16 दिसंबर’, ‘पहेली’ और ‘दे दना दन’ जैसी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। वे ‘बिग बॉस 3’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे बड़े रियलिटी शोज का भी हिस्सा रहीं। लेकिन, ग्लैमर की इस दुनिया के पीछे एक ऐसा दर्द छुपा है, जिसका खुलासा अदिति ने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया है।
इंटरव्यू के दौरान अदिति ने न केवल बॉलीवुड में मिलने वाले मौकों पर अपनी बेबाक राय रखी, बल्कि अपने बचपन के उन कड़वे अनुभवों को भी साझा किया, जिन्होंने उन्हें जीवनभर का ट्रॉमा दिया है।
अदिति ने बताया कि साल 2001 भारत के लिए ब्यूटी पेजेंट का स्वर्णिम वर्ष था। लारा दत्ता मिस यूनिवर्स बनीं, प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड और अदिति ने मिसेज वर्ल्ड का ताज पहना।
- अवसरों की कमी: अदिति के अनुसार, उस दौर में लारा और प्रियंका को जैसी शोहरत और फिल्में मिलीं, वैसी उन्हें नहीं मिल पाईं।
- इंडस्ट्री का रवैया: उन्होंने महसूस किया कि ‘मिसेज’ टैग होने की वजह से शायद इंडस्ट्री ने उन्हें वह तवज्जो नहीं दी जो अन्य विजेताओं को मिली, जिससे उनका दिल काफी दुखा।
हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में अदिति ने अपनी सुरक्षा को लेकर हुए डरावने अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वे महज 6 या 7 साल की थीं, तब उनके पिता के एक करीबी दोस्त ने उनके साथ बदसलूकी की थी।
- अपमान का एहसास: अदिति कहती हैं, “मैं इतनी छोटी थी कि पूरी तरह समझ नहीं पाई कि क्या हुआ था, लेकिन एक एहसास था कि कुछ बहुत गलत हुआ है। वह अपमान का भाव भयानक होता है और वह घाव कभी पूरी तरह ठीक नहीं होता।”
- बाजार की घटना: उन्होंने बताया कि परिवार के परिचित के अलावा बाजार में हुई एक और घटना ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया था।
पनवेल से मुंबई अपनी पढ़ाई के लिए आने वाली अदिति ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन ने उन्हें जीना सिखाया, लेकिन एक लड़की के तौर पर सुरक्षा हमेशा एक बड़ी चिंता थी।
- अग्रवाल क्लासेस का सफर: 12वीं की पढ़ाई के लिए वे दादर आती थीं। उन दिनों लोकल ट्रेनों के बजाय वे बस से सफर करती थीं।
- बैग बनी ढाल: अदिति ने अपनी सुरक्षा का एक अनोखा तरीका निकाला था। वे अपने दोनों तरफ बड़े बैग रखती थीं और उनके अंदर हार्डबोर्ड की किताबें रखती थीं ताकि कोई उन्हें गलत तरीके से छू न सके। अगर उन्हें बस में सीट मिल जाती, तो वे दोनों तरफ बैग रखकर खुद के लिए एक सुरक्षा कवच बना लेती थीं।
| वर्ष | उपलब्धि / प्रोजेक्ट | भूमिका |
| 2001 | मिसेज वर्ल्ड | विजेता (पहली भारतीय महिला) |
| 2002 | फिल्म ‘सोच’ | बॉलीवुड डेब्यू |
| 2005 | फिल्म ‘पहेली’ | महत्वपूर्ण भूमिका |
| 2009 | बिग बॉस 3 | कंटेस्टेंट |
| हालिया | पॉडकास्ट/इंटरव्यू | मेंटल हेल्थ और वेलनेस एडवोकेट |
अदिति गोवित्रिकर की कहानी केवल एक एक्ट्रेस की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लड़कियों की आवाज है जो हर दिन सार्वजनिक स्थानों पर अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करती हैं। बचपन के ट्रॉमा और इंडस्ट्री के भेदभाव के बावजूद, अदिति ने एक डॉक्टर और एक सफल महिला के रूप में अपनी जो पहचान बनाई है, वह काबिले तारीफ है। उनका यह इंटरव्यू समाज को आईना दिखाता है कि बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के प्रति नजरिया बदलना कितना जरूरी है।
