28 Feb 2026, Sat
Breaking

AI vs Jobs: “100 गुना बदल जाएगी दुनिया”; दुबई के अरबपति हुसैन सजवानी की भारत को बड़ी चेतावनी, आउटसोर्सिंग सेक्टर पर मंडराया संकट

News Scoop

न्यूज स्कूप : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पूरी दुनिया में छिड़ी बहस के बीच एक नई और गंभीर चेतावनी सामने आई है। दुबई में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 के दौरान, जाने-माने अरबपति कारोबारी और डेमाक ग्रुप (DAMAC Group) के चेयरमैन हुसैन सजवानी ने वैश्विक रोजगार के भविष्य पर चिंता जताई है। सजवानी ने विशेष रूप से भारत जैसे देशों को आगाह किया है, जिनकी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आउटसोर्सिंग सेवाओं पर टिका हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक केवल काम करने के तरीके को ही नहीं बदलेगी, बल्कि आने वाले समय में यह श्रम बाजार (Labor Market) के समीकरणों को पूरी तरह उलट सकती है।

हुसैन सजवानी की चेतावनी: “100 गुना बदलेगा भविष्य”

हुसैन सजवानी ने एआई के प्रभाव की तुलना इंटरनेट के शुरुआती दौर से की, लेकिन इसे कहीं अधिक शक्तिशाली बताया।

  • क्रांतिकारी बदलाव: सजवानी के अनुसार, इंटरनेट ने दुनिया को जितना बदला था, एआई उसका 100 गुना अधिक प्रभाव डालेगी। यह कोई मामूली सुधार नहीं, बल्कि एक पूर्ण औद्योगिक क्रांति है।
  • आउटसोर्सिंग पर जोखिम: उन्होंने कहा कि जो देश ‘आउटसोर्स लेबर’ (सस्ता श्रम और बैक-ऑफिस सेवाएं) प्रदान करने पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
  • ऑटोमेशन का प्रहार: ऐतिहासिक रूप से ऑटोमेशन ने शारीरिक श्रम की जगह ली थी, लेकिन एआई अब ‘बौद्धिक श्रम’ (Intellectual Labor) की जगह ले रहा है। यानी जो काम पहले बीपीओ या कॉल सेंटर्स में हजारों लोग करते थे, वह अब एआई सेकंडों में कर सकता है।

भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?

भारत को ‘दुनिया का बैक ऑफिस’ कहा जाता है। भारतीय आईटी (IT) और बीपीओ (BPO) सेक्टर देश की जीडीपी में बड़ा योगदान देते हैं और लाखों युवाओं को रोजगार प्रदान करते हैं।

  1. सर्विस हब: भारत में कोडिंग, डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट और फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसी सेवाएं बड़े पैमाने पर आउटसोर्स की जाती हैं। एआई इन सभी क्षेत्रों में इंसानी हस्तक्षेप को कम कर रहा है।
  2. आईटी सेक्टर में छंटनी: पिछले दो वर्षों में वैश्विक आईटी कंपनियों में हुई छंटनी ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि कंपनियां अब कम लोगों के साथ अधिक काम करने के लिए एआई टूल्स का सहारा ले रही हैं।
  3. अनुकूलन की जरूरत: सजवानी ने चेतावनी दी कि यदि भारत और उसके जैसे अन्य देशों ने समय रहते अपनी वर्कफोर्स को री-स्किल (Re-skill) नहीं किया, तो बेरोजगारी का संकट गहरा सकता है।

क्या है बचाव का रास्ता?

हुसैन सजवानी और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके लिए तैयार हुआ जा सकता है।

  • स्किल अपग्रेडेशन: पारंपरिक सेवाओं के बजाय डेटा साइंस, एआई मैनेजमेंट और एथिकल एआई जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करना होगा।
  • इनोवेशन पर जोर: केवल दूसरों का काम करने (आउटसोर्सिंग) के बजाय, भारत को खुद के एआई प्रोडक्ट्स और प्लेटफॉर्म्स विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • पॉलिसी सपोर्ट: सरकार को एआई आधारित नई अर्थव्यवस्था के लिए लचीली नीतियां और शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव लाने होंगे।

हुसैन सजवानी की यह चेतावनी भारत के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) की तरह है। एआई एक दोधारी तलवार है—यदि सही समय पर इसे अपनाया गया तो यह उत्पादकता को 100 गुना बढ़ा सकता है, लेकिन अगर अनदेखा किया गया तो यह करोड़ों नौकरियों के लिए खतरा बन सकता है।

By News Scoop Desk

News Scoop is a digital news platform that focuses on delivering exclusive, fast, verified and impactful stories to readers. Unlike traditional news portals that rely heavily on routine reports, a news scoop platform prioritizes breaking news, inside information, investigative leads, political developments, public interest stories and viral happenings fresh and first.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *