12 Mar 2026, Thu
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न्यूज स्कूप : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे दुनिया के बेहतरीन विशेषज्ञों में से एक क्यों हैं। एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने स्टेज-4 कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) से पीड़ित एक 43 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी कर उसके पेट से 20 किलो का ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है। चिकित्सा विज्ञान में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि कैंसर की चौथी स्टेज में इतनी भारी गांठ को सुरक्षित रूप से निकालना और मरीज की जान बचाना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

20 किलो का ट्यूमर और गंभीर चुनौतियां

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली मुनमुन जब एम्स दिल्ली पहुंची थीं, तो उनका पेट असामान्य रूप से फूला हुआ था। उन्हें भारीपन और असहनीय दर्द की शिकायत थी। एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एम. डी. रे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की।

जांच में पता चला कि कोलन कैंसर अब स्टेज-4 (Metastatic Stage) में पहुंच चुका है। ट्यूमर पैल्विक एरिया (पेड़ू) से लेकर पूरे पेट में फैल गया था और आसपास के अंगों को दबा रहा था। इस स्थिति में शरीर काफी कमजोर हो चुका था, जिससे सर्जरी के दौरान भारी रक्तस्राव (Blood Loss) और संक्रमण का खतरा बहुत अधिक था।

दो चरणों में हुआ इलाज और आधुनिक HIPEC तकनीक

डॉक्टरों ने इस केस को एक चुनौती के रूप में लिया और इलाज को दो चरणों में विभाजित किया:

  1. कीमोथेरेपी के 6 सेशन: सर्जरी से पहले मरीज को कीमोथेरेपी दी गई ताकि ट्यूमर की स्थिति में कुछ सुधार हो सके। पेट-सीटी (PET-CT) स्कैन में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद सर्जरी का फैसला लिया गया।
  2. मल्टी-ऑर्गन रिसेक्शन: सर्जिकल टीम ने बड़ी सावधानी से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैले 19.9 किलो के ट्यूमर को पूरी तरह बाहर निकाला।
  3. HIPEC थेरेपी: ट्यूमर हटाने के बाद भी कैंसर सेल्स के बचने की आशंका थी। इसके लिए HIPEC (Hyperthermic Intraperitoneal Chemotherapy) तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवा को सीधे पेट के अंदर डाला जाता है। यह तकनीक एडवांस्ड कैंसर में सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में बेहद कारगर है।

कोलन कैंसर स्टेज-4: एक नजर में

विवरणजानकारी
मरीज की उम्र43 वर्ष
ट्यूमर का वजनलगभग 20 किलोग्राम
कैंसर की स्थितिमेटास्टेटिक (चौथी स्टेज)
इस्तेमाल तकनीकमल्टी-ऑर्गन रिसेक्शन और HIPEC
मरीज की स्थितिस्थिर और रिकवरी मोड में

क्या होता है चौथी स्टेज का कैंसर?

जब कैंसर अपने मूल स्थान से निकलकर शरीर के दूसरे अंगों (जैसे लिवर, फेफड़े या पेरिटोनियम) में फैल जाता है, तो उसे चौथी स्टेज या मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है। इस स्थिति में आमतौर पर सर्जरी को बहुत जोखिम भरा माना जाता है और मरीज के बचने की संभावना कम होती है। हालांकि, एम्स के इस सफल ऑपरेशन ने उम्मीद की एक नई किरण जगाई है कि आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता से एडवांस्ड कैंसर का भी मुकाबला किया जा सकता है।

एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की यह कामयाबी न केवल मरीज मुनमुन के लिए नया जीवन लेकर आई है, बल्कि यह भविष्य में कैंसर के इलाज के लिए एक नया पैमाना भी तय करती है। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और उनके शरीर में इलाज का शानदार रिस्पांस देखा जा रहा है।

By News Scoop Desk

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