न्यूज स्कूप: 12 जून को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर हुए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे में दिवंगत हुए पायलट कैप्टन सुमित सबरवाल के 91 वर्षीय पिता पुष्कर राज सबरवाल ने शुक्रवार (7 नवंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट से हादसे की निष्पक्ष जाँच की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है।
याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि इस भीषण हादसे की अब तक की जाँच निष्पक्ष नहीं रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जाँच में तकनीकी खामियों को दरकिनार करने और हादसे का सारा दोष unfairly पायलटों पर मढ़ने की कोशिश की गई है।
कोर्ट ने जताई संवेदना, सुनवाई टली
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पायलट के वृद्ध पिता के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यह बोझ नहीं रखना चाहिए कि उनके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब तक की प्रारंभिक जाँच में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है और विदेशी मीडिया में प्रकाशित होने वाली कोई भी रिपोर्ट गलत हो सकती है।
कोर्ट ने बताया कि इस याचिका को पहले से लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ सुना जाएगा, जिसमें जाँच रिपोर्ट के चुनिंदा हिस्सों को प्रकाशित करने पर आपत्ति जताई गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स पर कोर्ट की नाराज़गी
इससे पहले 22 सितंबर को हुई सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराज़गी व्यक्त की थी। कोर्ट ने कहा था कि जाँच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए जाँच रिपोर्ट के चुनिंदा हिस्सों को प्रकाशित करके हादसे के लिए पायलट की गलती को हाइलाइट करना अनुचित है। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया के दौरान पूर्ण गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उस कॉकपिट ऑडियो का हवाला दिया गया था जिसमें कथित तौर पर पायलट कैप्टन सुमित सबरवाल और सह-पायलट क्लीव कुंदर की बातचीत का उल्लेख था। रिपोर्ट में कहा गया था कि एक पायलट ने पूछा था, “फ्यूल क्यों कट-ऑफ किया,” जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया, “मैंने नहीं किया।” ये रिपोर्ट्स जाँच की निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं।
भयानक हादसे का विवरण
याद रहे, 12 जून को एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद क्रैश हो गया था। विमान मेघाणी नगर इलाके में स्थित एक मेडिकल कॉलेज की मैस (Mess) पर गिरा था, जहाँ उस समय मेडिकल छात्र लंच कर रहे थे।
इस दर्दनाक हादसे में प्लेन पर सवार पायलटों, क्रू मेंबर्स और यात्रियों सहित 241 लोगों की जान चली गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि विमान में सवार यात्रियों में केवल एक यात्री ही ज़िंदा बचा था। इसके अलावा, जिस मेडिकल कॉलेज पर जहाज गिरा था, वहाँ भी 19 लोगों की मौत हुई थी, जिससे कुल मरने वालों की संख्या 260 तक पहुँच गई थी।
यह मामला अब कानूनी पेंच में फंस गया है, और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने वाली सुनवाई से ही पता चलेगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी।

